गर्मी से राहत पाने के साथ ही घूमने का उठाएं लुत्फ, जून में होने वाले इन फेस्टिवल में शामिल होकर

गर्मी से राहत पाने के साथ ही घूमने का उठाएं लुत्फ, जून में होने वाले इन फेस्टिवल में शामिल होकर

मई, जून का महीना सबसे गर्म महीना होता है लेकिन इससे राहत दिलाने का काम करते हैं देश के अलग-अलग जगहों पर होने वाले रंग-बिरंगे फेस्टिवल्स। जिसमें शामिल होकर आप एक साथ दो चीज़ें एन्जॉय कर सकते हैं। फेस्टिवल के अनोखे रंगों और कल्चर को देखने के साथ घूमना-फिरना भी। तो आइए जानते हैं जून माह के प्रमुख फेस्टिवल्स के बारे में।    

शिमला समर फेस्टिवल 

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का नज़ारा ही अलग होता है यहां होने वाले समर फेस्टिवल के दौरान। वैसे तो शिमला में हमेशा ही टूरिस्ट्स की भीड़ नज़र आती है लेकिन समर फेस्टिवल में यहां की रौनक दोगुनी हो जाती है। जिसमें शामिल होकर हिमाचल के लोकनृत्य, गीत, खानपान, पहनावे जैसी कई चीज़ों को एन्जॉय कर सकते हैं। 60 के दशक से ही शिमला में समर फेस्टिवल का आयोजन होता रहा है और इसकी लोकप्रियता आज भी वैसी ही बरकरार है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही हिमाचल की कला और संस्कृति को जीवित रखने का भी बेहतरीन जरिया है ये फेस्टिवल। 

कहां

शिमला

कब

2-7 जून 2019

सगा दवा फेस्टिवल 

पूरे एक महीने चलता है ये फेस्टिवल जो बौद्ध धर्म में बहुत ही महत्व रखता है खासतौर से तिब्बती और सिक्किम के महायान बौद्ध भिक्षुओं के लिए। यहां के मोनेस्ट्री में इस दौरान कई तरह के रीति-रिवाज़ देखने को मिलते हैं। गौतम बुद्ध के जन्म से लेकर उनके ज्ञानोदय और मृत्यु तक के सफर को भी इस फेस्टिवल में प्रस्तुत किया जाता है। बौद्ध भिक्षु, भगवान बुद्ध की याद में बटर लैंप्स जलाते हैं। उनका मानना है कि ये बटरलैंप्स उन भक्तों को रोशनी और राह देता है जो कहीं खो गए हैं। 

सिक्किम के मोनेस्ट्री में तो पूरे दिन प्रार्थना चलती रहती है। ये इंडिया के बहुत ही खास फेस्टिवल्स में से एक है। जिसमें शामिल होकर आप सिक्किम की खूबसूरती को एक्सप्लोर करने के साथ ही यहां के अलग कल्चर का एक्सपीरियंस भी ले सकते हैं। 

कहां

सिक्किम, दार्जिलिंग 

कब

8–26 जून 2019   

गंगा दशहरा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन ही मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। संत भागीरथ ने उन्हें धरती पर बुलाने के लिए सैकड़ों साल तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर मां गंगा ने ऐसा किया था। फेस्टिवल पूरे 10 दिनों तक मनाया जाता है समापन वाले दिन को शुक्ल दशमी कहा जाता है। 

इस दिन संत-महात्मा गंगा में स्नान करते हैं, मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा की पूजा करते हैं। जून में मनाए जाने वाला ये फेस्टिवल हिंदुओं के लिए बहुत ही खास होता है।

कहां

ऋषिकेश

कब

12 जून 2019

सिंधु दर्शन फेस्टिवल 

जून में मनाए जाने वाले रंगारंग फेस्टिवल्स में से ही एक है सिंधु दर्शन फेस्टिवल, जो लद्दाख में तीन दिनों तक मनाया जाता है। फेस्टिवल की शुरूआत 1997 से हुई थी। वैसे लद्दाख घूमने का बेस्ट सीज़न जून ही होता है मतलब अगर आप ट्रिप पर जाने की सोच रहे हैं लेकिन डेस्टिनेशन को लेकर कनफ्यूज़ हो रहे हैं तो लद्दाख का प्लान बनाएं। जब आप यहां के बेमिसाल खूबसूरती को  एक्सप्लोर करने के साथ ही फेस्टिवल का भी हिस्सा बनकर यहां की संस्कृति से भी रूबरू हो सकते हैं। 

कहां

लद्दाख

कब

12-14 जून 2019

ओचिरा काली

बहुत ही अलग तरह का फेस्टिवल है ये, जो पुराने समय में हुई एक लड़ाई की याद में लोग मनाते हैं। जिसमें दो समूह कायाकुलम और अलाप्पुझा के बीच लड़ाई हुई थी। पुरुष लड़ाकों के रूप में तैयार होते हैं और पानी में उतरकर ये लड़ाई करते हैं। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले औज़ार नकली होते हैं। टूरिस्ट्स इस नकली लड़ाई को भी बहुत एन्जॉय करते हैं और दूर-दूर से इसका आनंद लेने पहुंचते हैं। 

कहां

ओचिरा, केरल

कब

16-17 जून 2019

आंबुची मेला

जून की गर्मी से बचने के साथ ही रिफ्रेश होने के लिए कहीं जाने की सोच रहे हैं तो गुवाहाटी का ऑप्शन रहेगा परफेक्ट क्योंकि यहां लगता है आंबुची मेला। जो तीन दिनों तक चलता है और इस दौरान कामाख्या मंदिर बंद रहता है। तीन दिनों बाद देवी की प्रतिमा को नहलाया जाता है और उसके बाद ही भक्त दर्शन के लिए आ सकते हैं। 

कहां

गुवाहाटी

कब

22-25 जून

सेंट पीटर एंड पॉल फेस्टिवल

गोवा में ये फेस्टिवल मानसून आगमन के साथ ही संत पीटर और पॉल की बहादुरी के उपलक्ष्य खासतौर से यहां रहने वाले मछुआरा समुदाय के लोग मनाते हैं। नाच, गाने और भी अलग-अलग तरह के रंगारंग कार्यक्रमों द्वारा आपस में एन्जॉय करते हैं। तो गोवा के खूबसूरत बीचों को घूमने के साथ ही ये फेस्टिवल भी यहां के खास आकर्षणों में से एक है जिसे एक बार तो देखना बनता है।  


इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

कोरोनावायरस के नए वेरिएंट सी.1.2 के सामने आने के बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाले सभी भारत से बाहर के देशों से आने वाले पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें ये कहा है कि 3 सितंबर से यूके, यूरोप, मिड ईस्ट, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिंबॉब्वे से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी है। गौरतलब है कि नया कोविड वेरिएंट सी.1.2 पहली बार साउथ अफ्रीका में मिला था।

पुराने नियम खारिज

इस नए नियम के लागू होने के बाद से पुराने नियम रद्द हो जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज लगा होना और 65 साल से ज्यादा उम्र के वृद्धों को मिलने वाली छूट शामिल है। नए सर्क्युलर के मुताबिक, ट्रैवल करने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए क्वारंटाइन होने वाला नियम खत्म हो चुका है।

दूसरे देशों के यात्रियों को लानी होगी नेगेटिव रिपोर्ट

मुंबई एयरपोर्ट पर एक घंटे में कम से कम तीन यात्रियों की कोरोना जांच पूरी कर ली जाएगी।

ऊपर बताए गए देशों के अलावा अन्य देशों से आने वाले पैसेंजर्स को आने पर या कही और जाने वाले यात्रियों को 72 घंटे के अंदर का आरटी-पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना ही होगा। जिसके बाद ही पैसेंजर एयरपोर्ट से बाहर जा सकेगा।

ऐसे पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की पूरी व्यवस्था मौजूद होगी। वहां प्रतिघंटे 600 लोगों का टेस्ट किया जा सकता है।

दुनिया के इन देशों में मिला C.1.2 वैरिएंट

कोविड-19 के लिए WHO की टेक्निकल लीड मारिया वैन केरखोव ने मंगलवार को कहा कि C.1.2 वैरिएंट कम से कम 6 देशों में पाया गया है। WHO के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के रिसर्चर्स ने पहली बार 21 जुलाई को WHO वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप को C.1.2 वेरिएंट पर अपने रिजल्ट पेश किए थे। ये नया वेरिएंट पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। रिसर्चर ने मुताबिक C.1.2 वेरिएंट वुहान में जन्मे मूल वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है।