टेस्टी चॉकलेट्स से लेकर कॉफी और सिल्क साड़ियों की शॉपिंग के लिए मशहूर है कुर्ग के ये बाजार

टेस्टी चॉकलेट्स से लेकर कॉफी और सिल्क साड़ियों की शॉपिंग के लिए मशहूर है कुर्ग के ये बाजार

'कर्नाटक का कश्मीर' कहा जाने वाला कुर्ग प्राकृतिक खूबसूरती और एडवेंचर एक्टिविटीज़ के लिए ही मशहूर नहीं बल्कि शॉपिंग के लिए भी बहुत ही बेहतरीन जगह है। जहां से आप कॉफी, चॉकलेट्स, नेचुरल ऑयल्स, इलायची और भी कई तरह के मसालों की खरीददारी कर सकते हैं। 

कुर्ग में घने जंगलों में कॉफी कई तरह के मसाले जैसे मिर्च, इलायची के पेड़-पौधे भी देखने को मिलते हैं। जहां से आप प्योर मसालों खरीद सकते हैं। तो अगर आप कुर्ग आए तो घूमने-फिरने के साथ ही यहां के मार्केट का भी एक चक्कर जरूर लगाएं। आइए जानते हैं किस चीज़ के लिए कौन से मार्केट्स रहेंगे बेस्ट। 

कॉफी शॉपिंग

अगर आप कॉफी लवर हैं तो यहां के लोकल मार्केट्स से आप फ्रेश कॉफी की खरीददारी कर सकते हैं। शहद भी यहां बहुतायत मात्रा में मिलता है मतलब आप यहां बिना मिलावट वाला शुद्ध शहद का स्वाद चख सकते हैं और इसे घर भी ले जा सकते हैं। कुर्ग में संतरे की खेती भी होती है। सीज़न में आएंगे तो इसकी खरीददारी भी कर सकते हैं। कर्नाटक के खानपान का स्वाद बढ़ाने वाले पंधी और कादुमबुत्तू को तो जरूर साथ लें जाएं।

सिल्क साड़ी की खरीददारी

मसालों के अलावा कुर्ग की सिल्क साड़ी भी बहुत ही मशहूर है। यहां इनकी कई सारी दुकानें हैं और साड़ियों की वैराइटी भी। जिन्हें आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीद सकते हैं। हालांकि सिल्क साड़ियां आम साड़ियों के मुकाबले महंगी होती हैं लेकिन अगर आप कई सारी साड़ियां खरीदते हैं तो कुछ डिस्काउंट्स मिल सकता है। कई दुकानों पर पशमीना, फुलकारी के कपड़े भी मिलते हैं लेकिन क्वालिटी देखकर आप प्रोडक्ट लें या न लें ये खुद डिसाइड कर सकते हैं।   

बेहतरीन क्वालिटी के मसाले

कुर्ग के फ्राइडे मार्केट में अच्छी क्वालिटी के मसाले मिलते हैं वो भी कम बजट में। ये मार्केट रेलवे स्टेशन के काफी नज़दीक है और यहां तक पहुंचना बहुत ही आसान। यहां लगने वाले बाजार आपको आश्चर्यचकित कर देंगे। 

जरूरत का हर सामान है यहां अवेलेबल

कुर्ग में कुशाल नगर मार्केट शॉपिंग के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है जहां से आप जरूरत का हर सामान खरीद सकते हैं। हर एक चीज़ आपको यहां अपने बजट में मिल जाएगी। तिब्बती आर्ट एंड क्रॉफ्ट्स से लेकर इंपप्रिटेड टेबल, बॉक्स, धार्मिक स्टेच्यू, घर सजावट और भी कई सारी चीज़ें इस मार्केट में मौजूद हैं। इतना ही नहीं यहां से आप सिल्क साड़ियां भी खरीद सकते हैं। स्थानीय इत्र, चंदन तेल और लकड़ी के बहुत ही खूबसूरत सामान भी यहां से अपने साथ ले जाएं।


जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

नाहरगढ़ किला राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो दिखने में जितना अद्भुत है उतना ही विशाल भी। किले को जयसिंह द्वितीय ने सन् 1734 में बनवाया था। जो एक विशाल दीवार द्वारा जयगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। आमेर और जयगढ़ किले की ही तरह ये किला भी शहर की सुरक्षा का काम करता है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। और तो और कई मशहूर फिल्मों जैसे रंग दे बसंती और जोधा-अकबर फिल्मों के कई सीन यहां शूट हुए हैं।

नाहरगढ़ का शानदार किला

पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था जिसे बाद में बदलकर नाहरगढ़ रखा गया। महाराजा सवाई राम सिंह ने सन् 1868 में किले के अंदर भवनों का निर्माण और विस्तार करवाया था। रानियों के लिए अलग-अलग और बहुत ही सुंदर खंड हैं। नाहरगढ़ किले से पूरे शहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एडवेंचर पसंद हैं तो किले तक पहुंचने के लिए 2 किमी का ट्रैक भी कर सकते हैं।

नाहरगढ़ किले की बनावट

यह किला 700 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जिसकी वजह से आज तक इस पर कोई आक्रमण नहीं कर पाया। नाहरगढ़ की सबसे खूबसूरत जगह है माधवेंद्र भवन, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने डिज़ाइन किया था। भवन के अंदर आंतरिक साजसज्जा खूबसूरत भित्ति चित्रों और स्टको डिज़ाइन से की गई है। किले को शाही महिलाएं इस्तेमाल करती थी। किले में जनाना और मर्दाना महल का भी निर्माण करवाया गया था। 12 कमरों वाले माधवेंद्र भवन की खूबसूरती देखने लायक है। किले की आंतरिक साज सज्जा में भारतीय और यूरोपियन वास्तुकला का नायाब नमूना देखने को मिलता है। भवन में बने कक्ष गलियारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नाहरगढ़ किले की खूबसूरती रात के समय दोगुनी हो जाती है।

कब जाएं

नाहरगढ़ किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेस्ट होता है जब यहां का तापमान 20-24 डिग्री रहता है। ऐसे में आप आराम से किले की हर एक चीज़ को एन्जॉय कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

जयपुर लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है तो यहां तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कोई दिक्कत नहीं। घरेलू एयरपोर्ट यहां से 7 किमी दूर है तो वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी 10 किमी है। एयरपोर्ट पर टैक्सी और बसों की सुविधा अवेलेबल रहती है।

रेल मार्ग

जयपुर, गांधीनगर और दुर्गापुर ये तीन रेलवे स्टेशन हैं। स्टेशन पर मौजूद बसों और टैक्सी से आप आसानी से जहां तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

जयपुर के लिए राजस्थान परिवहन निगम की हर तरह की बसें अवेलेबल हैं। जिन्हें आप अपने कम्फर्ट के हिसाब से चुन सकते हैं।


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