नेपाल की खूबसूरत वादियों में आकर लें विदेशी सैर-सपाटे का मज़ा

नेपाल की खूबसूरत वादियों में आकर लें विदेशी सैर-सपाटे का मज़ा

नेपाल बहुत ही शांत और खूबसूरत जगह है। जिसे आप वादियों से लेकर भीड़भाड़ वाली जगहों तक महसूस कर सकते हैं। नेपाल खासतौर से मंदिरों के लिए जाना जाता है और यहां के बौद्ध स्तूपों तो दुनियाभर में मशहूर हैं। यहां का कल्चर और खानपान काफी हद तक भारत जैसा ही है। मतलब यहां आकर आपको खानेपीने की दिक्कतों नहीं होगी। नेपाल घूमने-फिरने की प्लानिंग आप कभी भी कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं नेपाल में घूमने वाली खास जगहों के बारे में...

नागरकोट

काठमांडू से 35 किमी दूर नागरकोट से माउंट एवरेस्ट और हिमालय की ऊंची चोटियों को देखा जा सकता है। नागरकोट पश्चिम में काठमांडू घाटी और पूर्व में इंद्रावती के बीच स्थित है। समुद्र से 2229 मीटर ऊंचे नागरकोट से सूरज निकलने और ढलने का बहुत ही सुंदर नजारा देखा जा सकता है।

पशुपतिनाथ

काठमांडू से 6 किमी दूर पशुपतिनाथ बहुत बड़ा मंदिर है। यहां भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर बागमती नदी के तट पर स्थित है और हरी-भरी वादियों से घिरा है। यह पैगोडा शैली में निर्मित है। पशुपतिनाथ मंदिर करीब एक मीटर ऊंचे चबूतरे पर बना है। चौकोर मंदिर का अधिकतर हिस्सा लकड़ी का बना है, जिसके चार दरवाजे हैं जो चांदी के बने हुए हैं। इसके ऊपर सिंह का चित्र लगा हुआ है। मुख्य मंदिर में भैंस के रूप में भगवान शिव के शरीर का अगला हिस्सा है। यहां गैर-हिंदुओं के आने पर पाबंदी है। इसलिए उन्हें मंदिर का दर्शन नदी की पूर्व दिशा की ओर से करना पड़ता है। शिवरात्रि के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की बहुत ज्यादा भीड़ होती है।

पोखरा घाटी

पोखरा घाटी नेपाल की दूसरी सबसे जाने-माने पर्यटन स्थलों में से है। यहां से हिमालय की ऊंची चोटियों को आसानी से देखा जा सकता है। यहां से माउंट मच्छापुछारे (6977 फीट) को देखना भी एक अलग ही अनुभव है। यहां पर्यटकों का तांता लगा रहता है।

बौद्धनाथ

काठमांडू से 11 किमी दूर बना ये स्तूप दुनिया के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। इसे बुद्ध की आंख के नाम से भी जाना जाता है, जो चारों दिशाओं में खुशी और संपन्नता बांटती है। ऐसा कहा जाता है कि देवी मनी जोगिनी के कहने पर राजा मन देवा ने इसे बनवाया था। मंदिर के चारों ओर लामा और बौद्ध भिक्षुओं के निवास बने हुए हैं।

पाटन

काठमांडू शहर से 5 किमी दूर बसे पाटन को ललितपुर के नाम से भी जाना जाता है। यह खास तौर पर चार बौद्ध स्तूपों के लिए जाना जाता है, जिन्हें अशोक द्वारा बनवाया बताया जाता है। तिब्बती रिफ्यूजी सेंटर और हस्तकलाओं का अनोखा नमूना देखना हो तो पाटम से अच्छी दूसरी जगह नहीं है। यहां हाथों से बनी कालीन और मेटल के स्टैचू देखे जा सकते हैं।

लुंबिनी

नेपाल को खासतौर पर भगवान बुद्ध के पवित्र स्थलों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, पहाड़ों और प्राचीन धरोहरों के लिए तो यह प्रसिद्ध है ही। बुद्ध एक बड़े राजपरिवार से थे। अपने जन्म के थोड़े ही समय बाद उन्होंने जहां-जहां अपने पैर रखे, कहा जाता है कि वहां कमल के फूल खिल गए थे। लुंबिनी का खास आकर्षण वहां का 8 स्क्वेयर किमी में फैला गार्डन है। यहां मायादेवी मंदिर भी देखने लायक है।  


इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

कोरोनावायरस के नए वेरिएंट सी.1.2 के सामने आने के बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाले सभी भारत से बाहर के देशों से आने वाले पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें ये कहा है कि 3 सितंबर से यूके, यूरोप, मिड ईस्ट, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिंबॉब्वे से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी है। गौरतलब है कि नया कोविड वेरिएंट सी.1.2 पहली बार साउथ अफ्रीका में मिला था।

पुराने नियम खारिज

इस नए नियम के लागू होने के बाद से पुराने नियम रद्द हो जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज लगा होना और 65 साल से ज्यादा उम्र के वृद्धों को मिलने वाली छूट शामिल है। नए सर्क्युलर के मुताबिक, ट्रैवल करने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए क्वारंटाइन होने वाला नियम खत्म हो चुका है।

दूसरे देशों के यात्रियों को लानी होगी नेगेटिव रिपोर्ट

मुंबई एयरपोर्ट पर एक घंटे में कम से कम तीन यात्रियों की कोरोना जांच पूरी कर ली जाएगी।

ऊपर बताए गए देशों के अलावा अन्य देशों से आने वाले पैसेंजर्स को आने पर या कही और जाने वाले यात्रियों को 72 घंटे के अंदर का आरटी-पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना ही होगा। जिसके बाद ही पैसेंजर एयरपोर्ट से बाहर जा सकेगा।

ऐसे पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की पूरी व्यवस्था मौजूद होगी। वहां प्रतिघंटे 600 लोगों का टेस्ट किया जा सकता है।

दुनिया के इन देशों में मिला C.1.2 वैरिएंट

कोविड-19 के लिए WHO की टेक्निकल लीड मारिया वैन केरखोव ने मंगलवार को कहा कि C.1.2 वैरिएंट कम से कम 6 देशों में पाया गया है। WHO के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के रिसर्चर्स ने पहली बार 21 जुलाई को WHO वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप को C.1.2 वेरिएंट पर अपने रिजल्ट पेश किए थे। ये नया वेरिएंट पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। रिसर्चर ने मुताबिक C.1.2 वेरिएंट वुहान में जन्मे मूल वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है।