बजट है कम और वीकेंड में कहीं बाहर जाकर करनी है मस्ती, तो...

बजट है कम और वीकेंड में कहीं बाहर जाकर करनी है मस्ती, तो...

शुक्रवार को सुबह से ही सोच-सोचकर बोरियत हो रही थी कि इस बार शनिवार-रविवार शायद घर में बैठना पड़ेगा और ये सोच मुझे बहुत ही परेशान कर देती है क्योंकि ट्रैवलिंग का ऐसा कीड़ा लग चुका है अंदर जो बड़ी ही मुश्किल से पूरे हफ्ते मैनेज करता है लेकिन वीकेंड आते ही एकदम से मुझपर हावी हो जाता है। खैर कोई प्लान न होने की वजह से मैं घर आकर अपना टीवी सीरियल देखने लगी थी तभी मेरी एक ट्रैवल फ्रेंड की कॉल आई कि यार बहुत बोर हो रही हूं कहीं चलते हैं ना...इतना कहना भर था उसका और मैंने हामी भर दी। एक घंटे का टाइम लिया पैकिंग का और बस अड्डे पर मिलना तय हुआ कि जहां कि बस मिलेगी वहां निकल लेंगे।

सुना तो था अचानक बनने वाला प्लान और भी मज़ेदार होता है अब बारी थी इसे एक्सपीरियंस करने की। तय समय और जगह पर हम दोनों दोस्त मिले और हरिद्वार, कोटद्वार, उत्तराखंड और शिमला की बसें लगी हुई थी तो हमने डिसाइड किया उत्तराखंड चलते हैं जहां से कई सारी जगह जाने का ऑप्शन होगा हमारे पास। दो लोग थे तो डिसीज़न लेने में वक्त बर्बाद नहीं किया और निकल पड़े उत्तराखंड की ओर।

रात का सफर था जो आसानी से कट गया और सुबह 6 बजे हम उत्तराखंड में थे। सोचा चाय की चुस्की लेते हुए डिसाइड करते हैं कि अब जाना कहां है। ऋषिकेश, मसूरी, नैनीताल, धनौल्टी ये सारी जगहें घूमी हुई थीं तो दोबारा जाने का कोई मतलब नहीं था। हां, रानीखेत हम दोनों के लिए नया था तो उसे एक्सप्लोर करने का प्लान बनाया। वहां के लिए बसें नहीं चलती। सूमो का ही ऑप्शन होता है। तो बिना चिकचिक किए हम सवार हो गए सूमो में और इतंजार करने लगे उसके भरने का क्योंकि गाड़ी तभी आगे बढ़ती है। 15-20 मिनट लग गए भरने में। फाइनली हम निकल पड़े रानीखेत की हसीन वादियों की ओर। सूमो से आराम से तो नहीं लेकिन कम पैसों में आप रानीखेत तक पहुंच सकते हैं तो अगर आप बजट ट्रैवलिंग के बारे में सोच रहे हैं तो ये बेस्ट रहेगा।  रानीखेत पहुंचकर हमने होटल लिया और थोड़ी देर रेस्ट किया और साथ ही साथ प्लानिंग भी कि कहां से घूमने-फिरने की शुरूआत की जाए। होटल के लोगों से बात की तो पता चला कि गोल्फ गाडर्न यहां के पॉप्लुयर टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक है और पास भी है।

गोल्फ गाडर्न    

रानीखेत का गोल्फ गाडर्न, एशिया का सबसे ऊंचा गोल्फ कोर्स है। जो मुख्य शहर से महज 5 किमी दूर स्थित है और साथ ही यहां देखने वाली अच्छी और खूबसूरत जगह। दूर-दूर तक बिछा हरे घास का मैदान और बर्फ से ढ़के पहाड़ का नज़ारा यहां से इतना बेहतरीन लगता है जिसे यहां आकर देखना ज्यादा अच्छा ऑप्शन होगा। हमने गोल्फ फोर्स के ज्यादातर जगहों को अपने कैमरे में कैद कर लिया। कुछ जगहों पर जाने की मनाही भी थी लेकिन हमारे पास इतने अच्छे-अच्छे लोकेशन्स की फोटोज़ आ चुकी थी जो संतुष्ट करने के लिए काफी थी।

अगला पड़ाव था झूला देवी मंदिर 

रानीखेत आने वाले लोग झूला देवी के दर्शन करने जरूर आते हैं तो हम भी उन्हीं में से एक थे। मां दुर्गा की यहां झूले पर प्रतिमा रखी हुई है और इसी वजह से इन्हें झूला देवी कहा जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मां दुर्गा यहां के जंगली जानवरों की रक्षा करती हैं। यहां लोग अपनी मनचाही इच्छा को पूरा करने के लिए मंदिर में घंटी बांधते हैं और उसके पूरा हो जाने पर उसे खोलने आते हैं। इसी वजह से मंदिर में चारों ओर घंटियां ही नज़र आ रही थीं।

चौबटिया गार्डन

चौबटिया गार्डन भी रानीखेत में घूमने वाली अच्छी जगह है। गार्डन कई तरह के पेड़-पौधों और फूलों से सजा हुआ रहता है। वैसे चौबटिया खासतौर से सेब के बागानों के लिए मशहूर है। लेकिन इसके अलावा खुबानी, प्लम और आडू के भी पेड़ देखने को मिलेंगे। 600 एकड़ में फैले चौबटिया गाडर्न में हमने काफी अच्छा टाइम बिताया। सेब के अलावा चौबटिया शहद के लिए भी बहुत मशहूर है। 

इसके अलावा आर्मी म्यूज़ियम, कुमांऊ रेजिमेंट सेंटर और रानी झील जैसी और भी दूसरी जगहें हैं जो देखने लायक है लेकिन समय कम होने की वजह से इन्हें देखने का प्लान ड्रॉप करना पड़ा। होटल लौटकर आराम किया और वापसी में हमारे पास बहुत सारा वक्त था तो आराम से ट्रेन की टिकट कराई और निकल लिए रानीखेत की खूबसूरत यादें समेटकर। 


जानिए, मीठे से लेकर तीखे तक की यहां मिलेगी ढेरों वैराइटी, मिस न करें महाराष्ट्र के ये जायके

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खाने की बात आए तो इंडिया की हर एक जगह अपनी कुछ न कुछ खासियत बटोरे हुए है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर एक जगह का खानपान अलग होने के साथ ही इतना खास है कि एक बार खाने के बाद आप उसे भूल नहीं पाएंगे। महाराष्ट्र का खानपान भी कुछ ऐसा ही नहीं। यहां की ज्यादातर डिशेज़ स्वाद में खट्टी-मीठी होती हैं जो लोगों को बहुत पसंद आती हैं। पोहा या हो मिसल पाव या फिर रगड़ा पेटीज़, इनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप गुजरात, लखनऊ और दिल्ली आकर भी देख सकते हैं। तो एक नज़र डालेंगे यहां के जायकों पर।कढ़ी

कढ़ी, महाराष्ट्रियन खानपान का बहुत ही खास हिस्सा है। जिसकी ग्रेवी काबुली चने से तैयार की जाती है और कई सारे सब्जियों को मिलाकर बनता है इसका पकौड़ा। ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें दही मिक्स किया जाता है। स्वाद के लिहाज से ही नहीं, इस डिश को गर्मियों में लोग हेल्दी रहने के लिए भी खाते हैं। कढ़ी के साथ चावल परोसा जाता है लेकिन कुछ लोग इसे मूंगदाल खिचड़ी के साथ भी एन्जॉय करते हैं। 

बासुंदी

ये एक स्वीट डिश है। इसमें दूध को धीमी आंच पर बहुत देर तक पकाया जाता है जब तक कि वो आधा न रह जाए। इसके बाद इसमें चीनी, इलायची और केसर मिक्स किया जाता है जो इसका स्वाद दोगुना कर देता है। वैसे इसे और भी कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें कस्टर्ड एप्पल बासुंदी और अंगूर बासुंदी बहुत मशहूर है।

महाराष्ट्रियन दाल

महाराष्ट्र में बनने वाली इस दाल की दूर तक फैली खुशबू ही भूख को बढ़ाने के लिए काफी होती है। खासतौर से विदर्भ में बनने वाली इस दाल को अब गोवा और कर्नाटक में भी बहुत चाव के साथ बनाया और खाया जाता है। इसे एक या दो नहीं बल्कि 51 अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है। जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। 

पिठला भाखरी

यहां इसे किसानों का खाना कहते हैं। इसे बनाने में न ही बहुत ज्यादा चीज़ों की जरूरत होती है और न ही समय की। पिठला को चावल के साथ सर्व किया जाता है जो थोड़ा लिक्विड रूप में होता है। ड्राय पिठला रोटी के साथ बहुत ही अच्छा लगता है।

पोहा

सुबह हो या शाम नाश्ते में सर्व करने के लिए पोहा है परफेक्ट डिश। पोहे को कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर है कांदा पोहा, जिसे बहुत सारे प्याज के साथ बनाया जाता है।  इसके अलावा बटाटा पोहा जिसमें आलू के टुकड़े होते हैं। एक और दूसरे तरह का पोहा जिसे नारियल, हरी मिर्च, अदरक और नींबू के रस से बनाया जाता है। सुबह होते ही यहां के दुकानों पर पोहा बनना शुरू हो जाता है। जो लाइट और हेल्दी होता है।

भारली वांगी

वैसे तो ये भरवां बैगन होते हैं लेकिन इन्हें बनाने का तरीका और स्वाद काफी अलग होता है। नारियल, प्याज, गुड़ और मराठी मसाले से तैयार होता है इसका भरावन। बैंगन का स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता लेकिन भारली वांगी का स्वाद चखने के बाद आप इसे भूल नहीं पाएंगे।

रगड़ा पेटिस

ये महाराष्ट्र का बहुत ही मशहूर स्ट्रीट फूड है। सूखी मटर से बनने वाली रगड़ा ग्रेवी को चटनी, बारीक कटे प्याज, टमाटर, सेव और हरी धनिया के साथ सजाकर परोसा जाता है। स्ट्रीट फूड के अलावा आप बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स में भी इसका स्वाद ले सकते हैं। 

मिसल पाव

मिसल पाव भी यहां नाश्ते में सर्व की जाने वाली डिश है। महाराष्ट्र के अलावा पुणे और मुंबई के लोगों की भी पसंदीदा डिश में शामिल है मिसल पाव। चटपटी और मसालेदार सब्जी को पाव के साथ परोसा जाता है। मिसल को स्वाद और पसंद के हिसाब से कई तरीकों से बनाया जाता है। पुनेरी मिसल, नागपुरी मिसल, कोल्हापुरी मिस और मुंबई मिसल उनमें से एक है।

पूरन पोली

अगर आपको पराठे खाना पसंद हैं तो महाराष्ट्र आकर पूरन पोली का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। जिसमें गुड़, चना दाल, इलायची की स्टफिंग होती है। त्योहार और उत्सवों में बनने वाली इस डिश को नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में कभी भी खाया जा सकता है।    

 तो महाराष्ट्र के खूबसूरत नजारे देखने के साथ ही यहां के जायकों को चखना बिल्कुल न भूलें खासतौर से स्ट्रीट फूड्स को क्योंकि ये रेस्टोरेंट के मुकाबले कहीं अधिक स्वादिष्ट होते हैं।