ये 5 जगहें,इनमें से एक स्थान पर लोग मरते नहीं

ये 5 जगहें,इनमें से एक स्थान पर लोग मरते नहीं

जब बात हिमालय की आती है, तो मानसरोवर, कैलाश अमरनाथ आदि पवित्र स्थानों की याद आ जाती है। इसके अलावा भी हिमालय में कई ऐसे स्थान हैं जो अपनी रहस्यों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। आज तक विज्ञान हिमालय के कई रहस्यों से पर्दा उठाने में सफल नहीं हो सका है। कई बार वैज्ञानिक इनमें से एक-दो जगहों पर पहुंचने की कोशिश की है। इस काम में भी वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिल पाई है। अगर आप भी इन जगहों से वाकिफ नहीं है, तो आइए हिमालय की रहस्यमयी जगहों के बारे में विस्तार से जानते हैं-

ज्ञानगंज

आधुनिक समय में ज्ञानगंज तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के निकट स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस जगह पर एक आश्रम है, जिसका निर्माण विश्वकर्मा जी ने की है। इस जगह पर आज भी भगवान राम, श्रीकृष्ण, बुद्ध आदि शरीर रूप में उपस्थित हैं। इसके साथ ही इस आश्रम में महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, महायोगी गोरखनाथ, श्रीमद शंकराचार्य, भीष्म, कृपाचार्य, कणाद, पुलस्त्य, अत्रि आदि को भौतिक रूपों में देखा जा सकता है। जबकि सैकड़ों ऋषिगण हजारों वर्षों से ध्यान करते देखे जा सकते हैं। इस स्थान के बारे में सर्वप्रथम स्वामी विशुद्धानंद परमहंस ने लोगों को जानकारी दी थी।


कोंगका ला दर्रा

हिमालय की गोद में बसा कोंगका ला दर्रा, लद्दाख में स्थित है। इस जगह पर जाना बेहद मुश्किल है क्योंकि यह दर्रा बर्फ से ढ़की है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद एक सहमति बनी। इस सहमति के तहत दोनों देशों के सैनिक इस जगह पर मार्च नहीं कर सकते हैं, बल्कि दूर से ही इसकी निगरानी कर सकते हैं। उस समय से यह जगह वीरान है। इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ सिद्ध पुरुष कोंगका ला दर्रा पर जाते हैं। जहां उन्हें उड़न तश्तरी देखने को मिलता है। अगर कोई व्यक्ति उड़न तश्तरी देखना चाहता है तो कोंगका ला दर्रा में इसे देख सकता है क्योंकि इस जगह पर हर महीने एलियंस आते हैं। लोगों की आवाजाही कम होने की वजह से एलियंस अपनी उड़न तस्तरी लेकर कोंगका ला दर्रा आते-जाते रहते हैं। विज्ञान अब तक उड़न तश्तरी की पहेली को सुलझा नहीं पाया है। इसलिए कोंगका ला दर्रा में एलियंस के आने का रहस्य अब भी बरकरार है।

"गंगखर पुनसुम"

जानकारों की मानें तो यह दुनिया में सबसे ऊंचा पर्वत है और आज तक इस पर्वत शिखर पर कोई पहुंच नहीं पाया है। दुनिया में यह इकलौता पर्वत है, जिसकी चोटी पर कोई नहीं चढ़ सका है। यह पर्वत भूटान में है। इस पर्वत पर अर्धमानव यति रहता है। कई बार पर्वतारोहियों सहित स्थानीय लोगों ने भी यति देखने का दावा किया है। तिब्बत के लोग इससे डरते हैं और इसकी पूजा करते भी हैं। वहीं, तिब्बती लोग ऊंचे पहाड़ों को भगवान मानते हैं। इसके लिए भी लोगों को "गंगखर पुनसुम" की चोटी पर  जाने की अनुमति नहीं है।

टाइगर नेस्ट मठ

यह मठ खड़ी चट्टान के किनारे स्थित है। इस मठ के मध्य में एक गुफा है। ऐसा कहा जाता है कि गुरु पद्मसंभव ने तीन साल, तीन महीने, तीन दिन और तीन घंटे तक कठिन तपस्या की थी। गुरु पद्मसंभव दूसरे बुद्ध के रूप में जाने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है बाघिन पर चढ़कर गुरु पद्मसंभव इस गुफा तक पहुंचे थे। अतः इसे टाइगर मठ के नाम से जाना जाता है। सन 1962 में मठ को बनाया गया, जो आज भी अवस्थित है।

गुरुडोंगमार झील

इस झील का संबंध गुरु पद्मसंभव है। ऐसा माना जाता है कि स्थानीय लोगों के अनुरोध पर गुरु पद्मसंभव ने झील एक हिस्से पर हाथ रखा। इसके बाद से कड़ाके सर्दी के दिनों में भी यह झील का यह स्थान नहीं जमता है। बाकी पूरा झील जम जाता है। यह झील भी सदियों से स्थानीय लोगों के लिए जल का साधन है।  गुरु पद्मसंभव को तांत्रिक भी माना जाता है।


17 फरवरी से पर्यटक कर सकेंगे स्पीति घाटी की सैर, जानें

17 फरवरी से पर्यटक कर सकेंगे स्पीति घाटी की सैर, जानें

देवों की भूमि उत्तराखंड से पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी आ रही है। खबरों की मानें तो लंबे समय के बाद 17 फरवरी से स्पीति घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इस बात की पुष्टि  The Spiti Tourism Society की तरफ से जारी आधिकारिक बयान से होती है, जिसमें कहा गया है कि पंचायत, ट्रेवल एजेंट्स, महिला मंडलस, होटल के ऑनर और समाजिक नेताओं ने संयुक्त रूप से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्पीति घाटी को खोलने का निर्णय लिया है। The Spiti Tourism Society की तरफ से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि पिछले एक साल से घाटी पर्यटकों के बिना सूना है। कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या में कमी और सरकार द्वारा टीकाकरण अभियान शुरू करने के बाद घाटी एकबार फिर से पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। हालांकि, कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए गाइडलाइंस तैयार किया गया है। पर्यटकों को नियमों का पालन करना होगा। आइए गाइडलाइंस जानते हैं-


-पर्यटकों का किब्बर और किब्बर वाइल्डलाइफ हैबिटेट में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। गांव वालों ने कोरोना काल में पर्यटकों को गांव में आने और ठहरने की अनुमति नहीं दी है।

-घाटी में आने वाले सभी पर्यटकों की RAT/RT-PCR टेस्ट अनिवार्य है। यह टेस्ट अधिकृत लैब अथवा हॉस्पिटल की वैध मानी जाएगी। यह जिम्मेदारी टूर ऑपरेटर्स की होगी कि RAT/RT-PCR टेस्ट वाले पर्यटकों को ही घाटी पर लाएं।

- घाटी पहुंचने से 72 से 96 घंटे पहले RAT/RT-PCR टेस्ट ही मान्य होगा।

 -स्पीति घाटी में आने वाले अकेले पर्यटक, चालक के साथ आने वाले पर्यटकों को सरकारी अस्पताल में रैपिड टेस्ट के लिए रिपोर्ट करना पड़ेगा।

-होटल्स और घर पर ठहरने देने वाले लोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यटक पूरी तरह से स्वस्थ हैं और पर्यटक में फ्लू आदि के लक्षण नहीं पाए गए हैं। इसके बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाए।

- किसी भी कीमत पर समाजिक दूरी का हर समय पालन करना होगा। पर्यटकों को ठहरने वाले स्थान से बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य है।

-पर्यटकों को खुद की और स्थानीय लोगों की सेहत और सुरक्षा का ख्याल रखना पड़ेगा। 


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