शुरू हो रहा है मैरीन ड्राइव इको रिट्रीट, जहां घूमने के साथ लें उत्सव का भी मजा

शुरू हो रहा है मैरीन ड्राइव इको रिट्रीट, जहां घूमने के साथ लें उत्सव का भी मजा

पुरी शहर का नाम सुनते ही आपका ध्यान किस ओर जाता है? संभवत: आप भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का जिक्र करेंगे, पर यहां दाखिल होने के बाद आप पाएंगे कि इस शहर का कैनवस बहुत विशाल है। जहां आंख झपकते ही गायब हो जाने वाली समंदर की लहरें हैं तो शहर की इतराती-बलखाती साफ-सुथरी सड़कों का आकर्षण है। आप साइकिल प्रेमी हैं या फिर कार सवारी के शौकीन या फिर पैदल चलना आपको पसंद है, जो भी हो, पुरी शहर की सड़कों का जादू आपको लुभा लेगा। यहां पुरी से कोणार्क तक शानदार मैरीन ड्राइव का जिक्र करना जरूरी है, जो यहां के पर्यटन का एक अलग लुत्फ देता है।

आप देश की सांस्कृतिक विरासत के मुरीद हैं तो भी पुरी आपको खूब भाएगा। हस्तशिल्प की धरोहरों को आप यहां के ग्रामीण जीवन की सैर कर जीवंत रूप में देख सकते हैं। पुरी शहर के आसपास स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों, जैसे-राजधानी भुवनेश्र्वर और कोणार्क जाकर पुरी शहर के विस्तार को बखूबी समझ सकते हैं।

गली-गली मंदिरों के दर्शन

श्रीक्षेत्र धाम भी कहलाता है यह शहर, जहां मंदिर ही मंदिर नजर आते हैं। जगन्नाथ पुरी ही नहीं, भुवनेश्र्वर में ऐतिहासिक महाप्रभु लिंगराज मंदिर से लेकर भव्य श्रीराम मंदिर, राजारानी मंदिर, इस्कान मंदिर आदि प्रमुख मंदिरों के साथ हजारों की संख्या में हर गली में आपको मंदिर दिखेंगे।पुरी में महाप्रभु श्री जगन्नाथ मंदिर के साथ मौसी मां मंदिर, अलारनाथ मंदिर के साथ सैकड़ों की संख्या में पुरातन मठ हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।हिंदू मान्यता के अनुसार, पुरी भारत के सात सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। भुवनेश्र्वर से लगभग 10 किमी. की दूरी पर मौजूद धउलीगिरि मंदिर है, जहां पर सम्राट अशोक, चंडाशोक से धर्माशोक बने थे।

रघुराजपुर- भारत की सांस्कृतिक राजधानी

हेरिटेज क्राफ्ट विलेज रघुराजपुर राज्य की खास धरोहर है। यह पुरी से 12 किमी. दूर स्थित है। पट्टचित्र यानी कपड़े पर कलाकारी का काम होता है यहां। यह कलाकारी भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के अलावा प्राचीन संस्कृति से जुड़ी है। यह एक विलक्षण गांव है, जहां कुछ घरों में कलाकार इस काम में तल्लीन नजर आते हें। रघुराजपुर को भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहा जा सकता है।

मैरीन ड्राइव इको रिट्रीट

ओडिशा सरकार द्वारा मैरीन ड्राइव पर आयोजित होने वाले इस उत्सव में आप विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के अलावा, फूड फेस्टिवल, वाटर स्पोर्ट्स व एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी लुत्फ ले सकते हैं। इसके लिए यहां पर बसाया जा रहे हैं शानदार टेंट कॉटेज भी, जिनमें लगभग पचास कमरे तैयार किए जाएंगे।

कैसे और कब जाएं

केवल बारिश के महीनों को छोड़कर यहां साल भर पर्यटकों के आगमन के लिए अनुकूल मौसम रहता है। यह प्रदेश सड़क, रेल एवं हवाई मार्ग से बेहतर जुड़ा हुआ है। प्रमुख हवाई अड्डा राजधानी भुवनेश्र्वर में है, जो कि श्रीक्षेत्र धाम पुरी एवं अन्य तमाम तीर्थ स्थलों व पर्यटनो स्थलों के केंद्र में है। रेल मार्ग के जरिए पर्यटक भुवनेश्र्वर एवं पुरी दोनों ही शहरों में मौजूद पर्यटन स्थल के लिए आसानी से आवागमन कर सकते हैं।


जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

नाहरगढ़ किला राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो दिखने में जितना अद्भुत है उतना ही विशाल भी। किले को जयसिंह द्वितीय ने सन् 1734 में बनवाया था। जो एक विशाल दीवार द्वारा जयगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। आमेर और जयगढ़ किले की ही तरह ये किला भी शहर की सुरक्षा का काम करता है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। और तो और कई मशहूर फिल्मों जैसे रंग दे बसंती और जोधा-अकबर फिल्मों के कई सीन यहां शूट हुए हैं।

नाहरगढ़ का शानदार किला

पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था जिसे बाद में बदलकर नाहरगढ़ रखा गया। महाराजा सवाई राम सिंह ने सन् 1868 में किले के अंदर भवनों का निर्माण और विस्तार करवाया था। रानियों के लिए अलग-अलग और बहुत ही सुंदर खंड हैं। नाहरगढ़ किले से पूरे शहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एडवेंचर पसंद हैं तो किले तक पहुंचने के लिए 2 किमी का ट्रैक भी कर सकते हैं।

नाहरगढ़ किले की बनावट

यह किला 700 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जिसकी वजह से आज तक इस पर कोई आक्रमण नहीं कर पाया। नाहरगढ़ की सबसे खूबसूरत जगह है माधवेंद्र भवन, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने डिज़ाइन किया था। भवन के अंदर आंतरिक साजसज्जा खूबसूरत भित्ति चित्रों और स्टको डिज़ाइन से की गई है। किले को शाही महिलाएं इस्तेमाल करती थी। किले में जनाना और मर्दाना महल का भी निर्माण करवाया गया था। 12 कमरों वाले माधवेंद्र भवन की खूबसूरती देखने लायक है। किले की आंतरिक साज सज्जा में भारतीय और यूरोपियन वास्तुकला का नायाब नमूना देखने को मिलता है। भवन में बने कक्ष गलियारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नाहरगढ़ किले की खूबसूरती रात के समय दोगुनी हो जाती है।

कब जाएं

नाहरगढ़ किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेस्ट होता है जब यहां का तापमान 20-24 डिग्री रहता है। ऐसे में आप आराम से किले की हर एक चीज़ को एन्जॉय कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

जयपुर लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है तो यहां तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कोई दिक्कत नहीं। घरेलू एयरपोर्ट यहां से 7 किमी दूर है तो वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी 10 किमी है। एयरपोर्ट पर टैक्सी और बसों की सुविधा अवेलेबल रहती है।

रेल मार्ग

जयपुर, गांधीनगर और दुर्गापुर ये तीन रेलवे स्टेशन हैं। स्टेशन पर मौजूद बसों और टैक्सी से आप आसानी से जहां तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

जयपुर के लिए राजस्थान परिवहन निगम की हर तरह की बसें अवेलेबल हैं। जिन्हें आप अपने कम्फर्ट के हिसाब से चुन सकते हैं।


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