ट्रेवल करते समय इन बातो का विशेष ध्यान रखना चाहिए

ट्रेवल करते समय इन बातो का विशेष ध्यान रखना चाहिए

ट्रैवल के दौरान हम सब लापरवाह और बेफिक्र हो जाते हैं। साथ में यात्रा कर रहे यात्रियों की सुविधा और परेशानी का हमें बिलकुल ध्‍यान नहीं होता क्‍योंकि उनसे हम रोज नहीं मिलने वाले होते। इसलिए ट्रैवल के दौरान जैसे खुद को सुविधा और आसानी होती है हम वैसा ही करते हैं। मगर क्‍या आप जानती हैं कि इससे आपके साथी यात्रियों के सामने आपकी कैसी इमेज बनती है? हो सकता है कि आप यह सोच कर इस बात का ख्‍याल मन में न लाएं कि, ‘ बाद में कौन मिलता है?’ मगर सफर के दौरान 1 घंटे के साथ में ही साथी यात्री आपकी हरकतों से आपकी खराब इमेज बना लेता हैं और भविष्‍य में यदि वे आपसे टकरा जाए या उस वक्‍त वे आपको कुछ कह दे तो, सोचिए सिचुएशन कितनी एंबैरसिगं हो जाएगी। इस लिए अगली बार सफर करें तो हमारे बताए हुए इन ट्रैवल एटीकेट्स जरूर ध्‍यान रखें।

गंदगी न फैलाएं : ट्रैवल के दौरान अगर आपकी आदत गंदगी फैलाने की है तो इसे सुधार लें। क्‍योंकि इससे आपके साथ ट्रैवल कर रहे दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है। दरअसल कुछ लोगों की आदत होती है कि यात्रा के दौराना भूख लगने पर वह खाना खाते हैं और उससे मची गंदगी को वैसा ही छोड़ देते हैं। मगर यह गलत आदत है। पहली बात तो यात्रा के दौरान अगर आप कुछ भी खा रही हैं तो इस बात का ध्‍यान रखिए कि खाना गिरे नहीं अगर गिर भी गया है तो खाने के बाद आप उस जगह को साफ कर दें।

तेज बात या म्‍यूजिक न सुनें:अगर ट्रैवल के दौरान आपको म्‍यूजिक सुनना पसंद है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। मगर इस बात का ध्‍यान रखें कि म्‍यूजिक सिर्फ आपके कानों तक ही सुनाई दे। कई लोगों की आदत होती है कि वे बिना हेडफोन्‍स के ही म्‍यूजिक सुनने लगते हैं। मगर इससे दूसरे ट्रैवलर्स को परेशानी होती है। इसलिए जब ट्रैवल पर निकलें तो हेडफोन्‍स जरूर रख लें।


 
बच्‍चों को संभालें: बच्‍चों के साथ ट्रैवल करना बहुत ही मुश्किल काम होता है। दरअसल बच्‍चे एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठ सकते। इससे भी बड़ी बात यह है कि बच्‍चों को जगह कोई भी अपने मतलब का खेल मिल ही जाता है। कई बार खेल खेल में ही बच्‍चे साथी यात्रियों को भी परेशान करने लगते हैं। ऐसे में यह आपका काम है कि आप अपने बच्‍चे को संभालें और दूसरे यात्रियों को परेशान न होने दें।


 
लगेज मैनेजमेंट :ट्रैवल के दौरान अपने लगेज को लेकर एलर्ट रहने में कोई बुराई नहीं है। मगर अपनी एलर्टनेस के चक्‍कर में यदि आप किसी दूसरे यात्री को उसका लगेज रखने की स्‍पेस न दें तो, यह सही बात नहीं है। ट्रैवल आपको और आपके साथी यात्री दोनों को करना है। ऐसे में सारी जगह पर अपना सामान फैला कर रखने से दूसरे यात्रियों को दिक्‍कत होगी। इसलिए अपना सामान अच्‍छे से मैनेज करें और दूसरों को उनका सामान रखने की जगह दें।


जानिए, मीठे से लेकर तीखे तक की यहां मिलेगी ढेरों वैराइटी, मिस न करें महाराष्ट्र के ये जायके

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खाने की बात आए तो इंडिया की हर एक जगह अपनी कुछ न कुछ खासियत बटोरे हुए है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर एक जगह का खानपान अलग होने के साथ ही इतना खास है कि एक बार खाने के बाद आप उसे भूल नहीं पाएंगे। महाराष्ट्र का खानपान भी कुछ ऐसा ही नहीं। यहां की ज्यादातर डिशेज़ स्वाद में खट्टी-मीठी होती हैं जो लोगों को बहुत पसंद आती हैं। पोहा या हो मिसल पाव या फिर रगड़ा पेटीज़, इनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप गुजरात, लखनऊ और दिल्ली आकर भी देख सकते हैं। तो एक नज़र डालेंगे यहां के जायकों पर।कढ़ी

कढ़ी, महाराष्ट्रियन खानपान का बहुत ही खास हिस्सा है। जिसकी ग्रेवी काबुली चने से तैयार की जाती है और कई सारे सब्जियों को मिलाकर बनता है इसका पकौड़ा। ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें दही मिक्स किया जाता है। स्वाद के लिहाज से ही नहीं, इस डिश को गर्मियों में लोग हेल्दी रहने के लिए भी खाते हैं। कढ़ी के साथ चावल परोसा जाता है लेकिन कुछ लोग इसे मूंगदाल खिचड़ी के साथ भी एन्जॉय करते हैं। 

बासुंदी

ये एक स्वीट डिश है। इसमें दूध को धीमी आंच पर बहुत देर तक पकाया जाता है जब तक कि वो आधा न रह जाए। इसके बाद इसमें चीनी, इलायची और केसर मिक्स किया जाता है जो इसका स्वाद दोगुना कर देता है। वैसे इसे और भी कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें कस्टर्ड एप्पल बासुंदी और अंगूर बासुंदी बहुत मशहूर है।

महाराष्ट्रियन दाल

महाराष्ट्र में बनने वाली इस दाल की दूर तक फैली खुशबू ही भूख को बढ़ाने के लिए काफी होती है। खासतौर से विदर्भ में बनने वाली इस दाल को अब गोवा और कर्नाटक में भी बहुत चाव के साथ बनाया और खाया जाता है। इसे एक या दो नहीं बल्कि 51 अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है। जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। 

पिठला भाखरी

यहां इसे किसानों का खाना कहते हैं। इसे बनाने में न ही बहुत ज्यादा चीज़ों की जरूरत होती है और न ही समय की। पिठला को चावल के साथ सर्व किया जाता है जो थोड़ा लिक्विड रूप में होता है। ड्राय पिठला रोटी के साथ बहुत ही अच्छा लगता है।

पोहा

सुबह हो या शाम नाश्ते में सर्व करने के लिए पोहा है परफेक्ट डिश। पोहे को कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर है कांदा पोहा, जिसे बहुत सारे प्याज के साथ बनाया जाता है।  इसके अलावा बटाटा पोहा जिसमें आलू के टुकड़े होते हैं। एक और दूसरे तरह का पोहा जिसे नारियल, हरी मिर्च, अदरक और नींबू के रस से बनाया जाता है। सुबह होते ही यहां के दुकानों पर पोहा बनना शुरू हो जाता है। जो लाइट और हेल्दी होता है।

भारली वांगी

वैसे तो ये भरवां बैगन होते हैं लेकिन इन्हें बनाने का तरीका और स्वाद काफी अलग होता है। नारियल, प्याज, गुड़ और मराठी मसाले से तैयार होता है इसका भरावन। बैंगन का स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता लेकिन भारली वांगी का स्वाद चखने के बाद आप इसे भूल नहीं पाएंगे।

रगड़ा पेटिस

ये महाराष्ट्र का बहुत ही मशहूर स्ट्रीट फूड है। सूखी मटर से बनने वाली रगड़ा ग्रेवी को चटनी, बारीक कटे प्याज, टमाटर, सेव और हरी धनिया के साथ सजाकर परोसा जाता है। स्ट्रीट फूड के अलावा आप बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स में भी इसका स्वाद ले सकते हैं। 

मिसल पाव

मिसल पाव भी यहां नाश्ते में सर्व की जाने वाली डिश है। महाराष्ट्र के अलावा पुणे और मुंबई के लोगों की भी पसंदीदा डिश में शामिल है मिसल पाव। चटपटी और मसालेदार सब्जी को पाव के साथ परोसा जाता है। मिसल को स्वाद और पसंद के हिसाब से कई तरीकों से बनाया जाता है। पुनेरी मिसल, नागपुरी मिसल, कोल्हापुरी मिस और मुंबई मिसल उनमें से एक है।

पूरन पोली

अगर आपको पराठे खाना पसंद हैं तो महाराष्ट्र आकर पूरन पोली का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। जिसमें गुड़, चना दाल, इलायची की स्टफिंग होती है। त्योहार और उत्सवों में बनने वाली इस डिश को नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में कभी भी खाया जा सकता है।    

 तो महाराष्ट्र के खूबसूरत नजारे देखने के साथ ही यहां के जायकों को चखना बिल्कुल न भूलें खासतौर से स्ट्रीट फूड्स को क्योंकि ये रेस्टोरेंट के मुकाबले कहीं अधिक स्वादिष्ट होते हैं।