21 सितंबर से पर्यटक कर सकेंगे ताजमहल का दीदार, जानें

21 सितंबर से पर्यटक कर सकेंगे ताजमहल का दीदार, जानें

घूमने के शौकीन पर्यटकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि लंबे समय अंतराल के बाद महोब्बत की निशानी ताजमहल को 21 सितंबर से खोल दिया जाएगा। इसके लिए तैयारी जोर शोर से चल रही है। इससे पहले कोरोना वायरस के चलते 17 मार्च को ताजमहल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। उस समय से पर्यटकों के ताजमहल में प्रवेश पर पाबंदी है, लेकिन अब 21 सितंबर से पर्यटक ताजमहल का दीदार कर सकते हैं। इसके लिए गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। साथ ही पर्यटकों को नई गाइडलाइंस का पालन करना होगा। आइए जानते हैं कि ताजमहल दीदार के लिए नए नियम क्या हैं-

-एक दिन में केवल 5 हजार पर्टयकों को ताजमहल परिसर में प्रवेश की अनुमति होगी। इसमें लंच से पहले 2500 पर्यटकों को ताजमहल परिसर में जाने दिया जाएगा। जबकि 2500 पर्यटक सेकंड हाफ में लंच के बाद ताजमहल का दीदार कर सकेंगे। हालांकि, आगरा किले में एक दिन में केवल 2500 लोगों को जाने की अनुमति दी जाएगी।  सुबह में 1300 और शाम में 1200 पर्यटक इस किले का दीदार कर सकेंगे।

 -ताजमहल परिसर के भीतर अनुमति प्राप्त सभी लाइसेंस प्राप्त फोटोग्राफरों को ताजमहल खुलने के बाद उस समय प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इनके लिए अलग से समय सारणी बनाई जाएगी। उसी आधार पर ही उन्हें प्रवेश की अनुमति होगी।

-पर्यटक एसआई फोन ऐप के जरिए ऑनलाइन टिकट खरीद सकते हैं। टिकट मोबाइल पर दिया जाएगा। जबकि दूसरे सेशन का टिकट दूसरे सेशन में बेचा जाएगा।

-ताजमहल शुक्रवार और रविवार को बंद रहेगा। जबकि आगरा किला रविवार को बंद रहेगा। इस दिन पर्यटक ताजमहल का दीदार नहीं कर पाएंगे।

-ताजमहल परिसर में प्रवेश द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था होगी। पर्यटकों को इस जगह सैनिटाइज़ किया जाएगा। जबकि ताजमहल परिसर में पर्टयकों को शारीरिक दूरी का ख्याल रखना पड़ेगा।

-ताजमहल परिसर को गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, समय-समय पर सैनिटाइज़ किया जाएगा। इस दौरान आम लोगों के प्रवेश पर पाबंदी होगी। ऐसी संभावना है कि अवकाश के दिन ताजमहल और उसके परिसर को सैनिटाइज़ किया जाएगा।

-पर्यटकों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है। अगर कोई बिना मास्क के आता है, तो उसे ताजमहल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।


जानिए, मीठे से लेकर तीखे तक की यहां मिलेगी ढेरों वैराइटी, मिस न करें महाराष्ट्र के ये जायके

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खाने की बात आए तो इंडिया की हर एक जगह अपनी कुछ न कुछ खासियत बटोरे हुए है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर एक जगह का खानपान अलग होने के साथ ही इतना खास है कि एक बार खाने के बाद आप उसे भूल नहीं पाएंगे। महाराष्ट्र का खानपान भी कुछ ऐसा ही नहीं। यहां की ज्यादातर डिशेज़ स्वाद में खट्टी-मीठी होती हैं जो लोगों को बहुत पसंद आती हैं। पोहा या हो मिसल पाव या फिर रगड़ा पेटीज़, इनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप गुजरात, लखनऊ और दिल्ली आकर भी देख सकते हैं। तो एक नज़र डालेंगे यहां के जायकों पर।कढ़ी

कढ़ी, महाराष्ट्रियन खानपान का बहुत ही खास हिस्सा है। जिसकी ग्रेवी काबुली चने से तैयार की जाती है और कई सारे सब्जियों को मिलाकर बनता है इसका पकौड़ा। ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें दही मिक्स किया जाता है। स्वाद के लिहाज से ही नहीं, इस डिश को गर्मियों में लोग हेल्दी रहने के लिए भी खाते हैं। कढ़ी के साथ चावल परोसा जाता है लेकिन कुछ लोग इसे मूंगदाल खिचड़ी के साथ भी एन्जॉय करते हैं। 

बासुंदी

ये एक स्वीट डिश है। इसमें दूध को धीमी आंच पर बहुत देर तक पकाया जाता है जब तक कि वो आधा न रह जाए। इसके बाद इसमें चीनी, इलायची और केसर मिक्स किया जाता है जो इसका स्वाद दोगुना कर देता है। वैसे इसे और भी कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें कस्टर्ड एप्पल बासुंदी और अंगूर बासुंदी बहुत मशहूर है।

महाराष्ट्रियन दाल

महाराष्ट्र में बनने वाली इस दाल की दूर तक फैली खुशबू ही भूख को बढ़ाने के लिए काफी होती है। खासतौर से विदर्भ में बनने वाली इस दाल को अब गोवा और कर्नाटक में भी बहुत चाव के साथ बनाया और खाया जाता है। इसे एक या दो नहीं बल्कि 51 अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है। जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। 

पिठला भाखरी

यहां इसे किसानों का खाना कहते हैं। इसे बनाने में न ही बहुत ज्यादा चीज़ों की जरूरत होती है और न ही समय की। पिठला को चावल के साथ सर्व किया जाता है जो थोड़ा लिक्विड रूप में होता है। ड्राय पिठला रोटी के साथ बहुत ही अच्छा लगता है।

पोहा

सुबह हो या शाम नाश्ते में सर्व करने के लिए पोहा है परफेक्ट डिश। पोहे को कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर है कांदा पोहा, जिसे बहुत सारे प्याज के साथ बनाया जाता है।  इसके अलावा बटाटा पोहा जिसमें आलू के टुकड़े होते हैं। एक और दूसरे तरह का पोहा जिसे नारियल, हरी मिर्च, अदरक और नींबू के रस से बनाया जाता है। सुबह होते ही यहां के दुकानों पर पोहा बनना शुरू हो जाता है। जो लाइट और हेल्दी होता है।

भारली वांगी

वैसे तो ये भरवां बैगन होते हैं लेकिन इन्हें बनाने का तरीका और स्वाद काफी अलग होता है। नारियल, प्याज, गुड़ और मराठी मसाले से तैयार होता है इसका भरावन। बैंगन का स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता लेकिन भारली वांगी का स्वाद चखने के बाद आप इसे भूल नहीं पाएंगे।

रगड़ा पेटिस

ये महाराष्ट्र का बहुत ही मशहूर स्ट्रीट फूड है। सूखी मटर से बनने वाली रगड़ा ग्रेवी को चटनी, बारीक कटे प्याज, टमाटर, सेव और हरी धनिया के साथ सजाकर परोसा जाता है। स्ट्रीट फूड के अलावा आप बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स में भी इसका स्वाद ले सकते हैं। 

मिसल पाव

मिसल पाव भी यहां नाश्ते में सर्व की जाने वाली डिश है। महाराष्ट्र के अलावा पुणे और मुंबई के लोगों की भी पसंदीदा डिश में शामिल है मिसल पाव। चटपटी और मसालेदार सब्जी को पाव के साथ परोसा जाता है। मिसल को स्वाद और पसंद के हिसाब से कई तरीकों से बनाया जाता है। पुनेरी मिसल, नागपुरी मिसल, कोल्हापुरी मिस और मुंबई मिसल उनमें से एक है।

पूरन पोली

अगर आपको पराठे खाना पसंद हैं तो महाराष्ट्र आकर पूरन पोली का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। जिसमें गुड़, चना दाल, इलायची की स्टफिंग होती है। त्योहार और उत्सवों में बनने वाली इस डिश को नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में कभी भी खाया जा सकता है।    

 तो महाराष्ट्र के खूबसूरत नजारे देखने के साथ ही यहां के जायकों को चखना बिल्कुल न भूलें खासतौर से स्ट्रीट फूड्स को क्योंकि ये रेस्टोरेंट के मुकाबले कहीं अधिक स्वादिष्ट होते हैं।