प्राकृतिक संसाधनो से भरपूर राज्य झारखण्ड जैसे झरने और कही...

प्राकृतिक संसाधनो से भरपूर राज्य झारखण्ड जैसे झरने और कही...

पर्यटकों के लिए भारत का सबसे ज्यादा प्राकृतिक संसाधनो से भरपूर राज्य झारखण्ड में बहुत सारे ऐसे दृश्य है. जो आपके मन को उनकी और आकर्षित करते है. जिनको देखकर आपको एक सुखद आनंद की अनुभूति होगी.

देखे जाने वाले स्थानो में मंदिर, झरने, बांध है. इनमे सबसे ज्यादा अच्छे लगनी वाली में झरनो की खूबसूरती है. झरने को देखना एक अदभुत नज़ारे से कम नहीं वैसे झारखण्ड प्राकृतिक संसाधनो से पूरी तरह सजा हुआ है.

कौन कौन से स्थान है जो आपको आकषिर्त करते है.

1. हिरणी फ़ोल : झारखण्ड का यह खूबसूरत नजारा घने जंगलो के बीच घिरा है इसकी दुरी झारखण्ड की राजधानी रांची से 75 किलोमीटर पड़ती है. यहाँ पर जाने के लिए आपको बस या किसी निजी वहां से जाना पड़ेगा यहाँ जाने से पहले आपको बहुत सारे खूबसूरत नज़ारे रास्ते में देखने को मिलेंगे क्योकि इसके आस पास बहुत सुन्दर दृश्य जिसके कारण यह प्रसिद्ध है.

2. सीता फ़ोल : रांची से इसकी दुरी 45  किलो मीटर पड़ती है.यह भी खूबसूरती में कम नहीं है इसका नाम माँ सीता के नाम पर पड़ा है.

3. रजरप्पा फ़ोल : यहाँ पर बहुत खूबसूरत मंदिरो का निर्माण हुआ है.जो काफी प्रशिद्ध है.यह दो नदियों के संगम पर स्थित है.यहाँ नदी की तेज धारा बहती है. पर्यटक यहाँ पर साल भर आते रहते है.यहा बोटिंग भी की जाती है. रांची से इसकी दुरी 65  किलोमीटर है यहाँ पर आने के लिए बहुत सारे वहां आपको मिल जायेंगे.

4. जोन्हा फ़ोल : रांची से इसकी दुरी 40  किलोमीटर है. यहाँ पर भगवान बुद्ध ने नदी में स्नान किया था इसका नाम जोन्हा पड़ने कारण यहाँ नजदीक एक गावं जोन्हा है.जिसके नाम पर पड़ा यह पर पहाड़ियों के ऊपर से निचे गिरता कंचन पानी जो आपके मन को हर लेता है. इसको देखने लिए साल भर देश के कई जगह से लोग आते रहते है.

5. हुडरू फ़ोल : इसका प्रसिद्ध होने का कारण यहाँ पर पहाड़ो से गुजरकर स्वर्णरेखा नदी लगभग 320  फिट की उचाई से निचे गिरती है.जिसका मनोरम जल आपको आकर्षित करता है. आप इन झरनो में गर्मी के समय ही स्नान करे. क्योकि उस समय  पानी भी कम रहता और गहराई भी कम होती लेकिन बारिश के समय आप यहाँ कोई जोखिम ना उठाए .रांची से इसकी दुरी 28  किलोमीटर है .आप बी रोड से यहाँ जा सकते हो.

6. दसम फ़ोल : इसकी सुंदरता पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती है और इसका नाम वहाँ के एक बाघ के ऊपर से पड़ा है. यहाँ पर कांची नदी का एक झरना पहाड़ियों के ऊपर से 144  फिट निचे गिरता है. जो की बहुत ही सुन्दर दिखता है. यहाँ पर प्राकृतिक संसाधनो की कई बड़ी बड़ी खदाने है.आपको यहाँ बहुत सारे स्थान देखने को मिलेंगे जिनको देखकर आप खुश हो जायेंगे.रांची से इसकी दुरी 40  किलोमीटर है.यहाँ रोड से जा सकते है.


इस जलेबी का स्वाद लंबे अर्से तक रह जाएगा याद

इस जलेबी का स्वाद लंबे अर्से तक रह जाएगा याद

यहां आकर अपने आप मुंह से यही निकलता है। इनका साइज़ ही है इतना बड़ा। सिर्फ एक जलेबी काफी है अंदर तक घुली चाशनी और देसी घी की खुशबू देर तक मुंह का स्वाद बरकरार रखने के लिए। चाहे सिंपल खाएं या रबड़ी के साथ, यह स्वाद आपको लंबे अर्से तक याद रह जाएगा। दोने में रखी एक सादी जलेबी है लगभग 100 ग्राम वजन की, जिसका मूल्य है 50 रुपए, जबकि रबड़ी के साथ इसकी कीमत है 75 रुपए।

स्वाद का सीक्रेट

बहुत पुराना है स्वाद का यह ठिकाना...ऊपर बोर्ड लगा है ओल्ड फेमस जलेबी वाला और स्थापना वर्ष है 1884, पिछली चार पीढ़ियों से यह जगह और यह स्वाद कायम है। बड़े कड़ाहे में छनती बड़ी-बड़ी जलेबियां और बगल में एक कड़ाही में तले जाते समोसे, एक तरफ रखी रबड़ी, चारों ओर फैली घी की खुशबू। खुशबू और स्वाद की खास वजह है शुद्ध देसी घी और देसी खांडसारी चीनी।

ऐसे हुई स्थापना

जलेबी की इस दुकान की स्थापना की थी स्व. लाला नेम चंद जैन ने। बताया जाता है कि वो आगरा से 1884 में मात्र 2 रूपए लेकर दिल्ली आ गए थे। इसी पैसे से उन्होंने अपना छोटा सा कारोबार शुरू किया और आज यहां तक पहुंच गए। जलेबी का यह स्वाद पाने तक उन्होंने कई तरीके आजमाए, इंग्रेडिएंट्स में बदलाव किया, तब जाकर यह स्वाद मिला, जो आज लोगों की जुबान पर चढ़ कर बोल रहा है। आज यह तो नहीं है लेकिन उनकी भावी पीढ़ियां स्वाद की इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। 

चर्चे इनके दूर-दूर तक 

इन जलेबियों का स्वाद दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। चौथी पीढ़ी तक पहुंचते-पहुंचते यह देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। लोग इन्हें शादी-ब्याह के ऑर्डर देते हैं। दिल्ली घूमने वाले भी यहां आते हैं। देश के बाहर भी यूएस, यूके, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और केनेडा तक इस स्वाद की धमक पहुंची है। मशहूर राजनीतिज्ञों से लेकर फिल्म स्टॉर्स तक इन जलेबियों का स्वाद लेने लाल किले के पास बनी इस दुकान तक पहुंचते हैं। स्वाद का यह ठिकाना राजनैतिक मतभेदों और धार्मिक मतभेदों से दूर है। हर वर्ग, जाति, धर्म और राजनीतिक दल के लोग इस स्वाद के मुरीद हैं। 


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