नोकरेक नेशनल पार्क आकर देखें दुर्लभ पेड़-पौधे और जानवरों का समूह

नोकरेक नेशनल पार्क आकर देखें दुर्लभ पेड़-पौधे और जानवरों का समूह

मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले में स्थित है नोकरेक नेशनल पार्क। 47.48 वर्ग किमी में फैले इस पार्क का नाम गारो जिले की सबसे ऊंची चोटी नोकरेक पर रखा गया है। ऊंचाई पर स्थित पार्क की खूबसूरती बढ़ाने का काम करते हैं पेड़-पौधों का घना जंगल। जिसमें कई प्रकार के दुर्लभ वनस्पतियों और जानवरों को देखा जा सकता है। नोकरेक नेशनल पार्क एक बायोस्फियर रिजर्व भी है जिसे नोकरेक बायोस्फियर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है।


सन् 1986 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा मिला और साल 2009 में इसे यूनेस्को की धरोधर सूची में शामिल किया गया।
नोकरेक नेशनल पार्क की खासियत

इस नेशनल पार्क ने कई पेड़-पौधों और जीवजन्तुओं को सुरक्षित रखा है। वातावरण के साथ ही यहां उनके खाने-पीने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में चीज़ें मौजूद हैं।

पेड़-पौधे

नोकरेक के घने जंगलों में ऑर्किड, सफेद मेरांति, चेम्पाका, भव्य रसमाला और जंगली नींबू पाए जाते हैं। पार्क में साइट्रस इंडिया के लुप्तप्राय होने की कगार पर पहुंच चुके पेड़ भी हैं।

जीव-जन्तु

हाथी, लाल पांडा, अलग-अलग प्रकार के बिलाव, हूलोक गिबन,सेरो, पांगोलिन, जंगली भैंस, गोल्डन बिल्ली, हॉर्नबिलस, मोर, फिजेंट, होलॉक, तेंदुए, लंगूर जैसे कई जानवरों को देखा जा सकता है।

नोकरेक नेशनल पार्क में आएं तो यहां की कुछ लोकप्रिय जगहों की सौर बिल्कुल भी मिस न करें। नोकरेक चोटी और रोंगबांग वॉटरफाल्स देखने वाली काफी अच्छी जगहें हैं। नेपाक लेक और सीजू केव को देखने को मौका बिल्कुल न मिस करें। सीज़ू गुफा में पानी भरा रहता है। तो यहां संभलकर जाएं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

यहां तक पहुंचने का सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट गुवाहाटी है जहां से इस नेशनल पार्क की दूरी 140 किमी है। एयरपोर्ट सड़कमार्ग से भली-भांति जुड़ा हुआ है तो आप आराम से टैक्सी लेकर अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग

अगर आप ट्रेन से आने की प्लानिंग कर रहे हैं तो गुवाहाटी नज़दीकी रेलवे स्टेशन है। यहां से ये नेशनल पार्क 160 किमी दूर है।

सड़क मार्ग

नोकरेक नेशनल पार्क गुवाहाटी के ज्यादातर शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। जहां के लिए सरकारी और प्राइवेट बसों दोनों तरह की बसें अवेलेबल हैं।

कब आएं

अक्टूबर से मई तक का महीना नेकरेक नेशनल पार्क को एक्सप्लोर करने के लिए है बेस्ट।


जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

नाहरगढ़ किला राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो दिखने में जितना अद्भुत है उतना ही विशाल भी। किले को जयसिंह द्वितीय ने सन् 1734 में बनवाया था। जो एक विशाल दीवार द्वारा जयगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। आमेर और जयगढ़ किले की ही तरह ये किला भी शहर की सुरक्षा का काम करता है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। और तो और कई मशहूर फिल्मों जैसे रंग दे बसंती और जोधा-अकबर फिल्मों के कई सीन यहां शूट हुए हैं।

नाहरगढ़ का शानदार किला

पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था जिसे बाद में बदलकर नाहरगढ़ रखा गया। महाराजा सवाई राम सिंह ने सन् 1868 में किले के अंदर भवनों का निर्माण और विस्तार करवाया था। रानियों के लिए अलग-अलग और बहुत ही सुंदर खंड हैं। नाहरगढ़ किले से पूरे शहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एडवेंचर पसंद हैं तो किले तक पहुंचने के लिए 2 किमी का ट्रैक भी कर सकते हैं।

नाहरगढ़ किले की बनावट

यह किला 700 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जिसकी वजह से आज तक इस पर कोई आक्रमण नहीं कर पाया। नाहरगढ़ की सबसे खूबसूरत जगह है माधवेंद्र भवन, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने डिज़ाइन किया था। भवन के अंदर आंतरिक साजसज्जा खूबसूरत भित्ति चित्रों और स्टको डिज़ाइन से की गई है। किले को शाही महिलाएं इस्तेमाल करती थी। किले में जनाना और मर्दाना महल का भी निर्माण करवाया गया था। 12 कमरों वाले माधवेंद्र भवन की खूबसूरती देखने लायक है। किले की आंतरिक साज सज्जा में भारतीय और यूरोपियन वास्तुकला का नायाब नमूना देखने को मिलता है। भवन में बने कक्ष गलियारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नाहरगढ़ किले की खूबसूरती रात के समय दोगुनी हो जाती है।

कब जाएं

नाहरगढ़ किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेस्ट होता है जब यहां का तापमान 20-24 डिग्री रहता है। ऐसे में आप आराम से किले की हर एक चीज़ को एन्जॉय कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

जयपुर लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है तो यहां तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कोई दिक्कत नहीं। घरेलू एयरपोर्ट यहां से 7 किमी दूर है तो वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी 10 किमी है। एयरपोर्ट पर टैक्सी और बसों की सुविधा अवेलेबल रहती है।

रेल मार्ग

जयपुर, गांधीनगर और दुर्गापुर ये तीन रेलवे स्टेशन हैं। स्टेशन पर मौजूद बसों और टैक्सी से आप आसानी से जहां तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

जयपुर के लिए राजस्थान परिवहन निगम की हर तरह की बसें अवेलेबल हैं। जिन्हें आप अपने कम्फर्ट के हिसाब से चुन सकते हैं।


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