सैलानी परिंदों की जन्नत है गुजरात नल सरोवर

सैलानी परिंदों की जन्नत है गुजरात नल सरोवर

आप पक्षियों से प्यार करते है और अलग-अलग पक्षियों को देखना उनके बारे में जानना आपको पसंद है तो आपके लिए नल सरोवर से बेहतर जगह कोई नहीं हो सकती. नम भूमि क्षेत्र नल सरोवर अपने दुर्लभ जीवन चक्र के लिए जाना जाता है,जिस कारण यह एक अनूठी जैवविविधता को बचाए हुए है. नल का वातावरण अनेक प्रकार के जीव जन्तुओं के लिए उपयुक्त है और एक भोजन श्रृंखला बनाता है.

मछलियों का लालच पक्षियों को यहां आकर्षित करता है. गुजरात का नल सरोवर भारत में ताजे पानी के बाकी नम भूमि क्षेत्रों से कई मायनों में भिन्न है. सर्दियों  में उपयुक्त मौसम, भोजन की पर्याप्तता और सुरक्षा ही इन सैलानी पक्षियों को यहां आकर्षित करती है. सर्दियों में सैकड़ों प्रकार के लाखों स्वदेशी पक्षियों का जमावड़ा रहता है. इतनी बड़ी तादाद में पक्षियों के डेरा जमाने के बाद नल में उनकी चहचाहट से रौनक बढ़ जाती है. नल में इन्हीं उड़ते सैलानियों की जलक्रीड़ाएं व स्वर लहरियों को देखने-सुनने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां प्रतिदिन जुटते हैं. पर्यटकों के अतिरिक्त यहां पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधार्थी व छात्रों का भी जमावड़ा लगा रहता है तो कभी-कभार यहां पर लंबे समय से भटकते ऐसे पक्षी प्रेमी भी आते हैं जो किसी खास पक्षी के छायाचित्र भी उतारने की तलाश में रहते हैं.


दिसंबर व जनवरी में इनकी संख्या अधिकतम होती है. फरवरी के अंत में नल में भोजन व जलस्तर में कमी व गर्मी के बढ़ने के चलते मेहमान पक्षी अपने मूल घरों को लौटने लगते हैं. गर्मी के बाद प्रकृति बदलती है और एक बार फिर से वही जीवन चक्र शुरू हो जाता है. नल एक खास प्रकार की जैवविविधता को बचाये है. नल सरोवर का परिवेश विशिष्ट प्रकार की  वनस्पतियों, जल पक्षियों, मछलियों, कीट पतंगों व जीव-जंतुओं की शरण प्रदान करता है.

क्या और कैसे देखे- 1969 में अभयारण्य का दर्जा मिलने के बाद से उठाए गए कदमों से इसमें मेहमान विदेशी व स्वदेशी पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है कभी कुछ हजार तक सीमित रहने वाली संख्या आज 2.5 लाख प्रतिवर्ष से ऊपर ही है. सरोवर क्षेत्र में 225 प्रकार के मेहमान पक्षी तक देखे गए हैं जिनमें से सौ प्रकार के प्रवासी जल पक्षी हैं. इसके अतिरिक्त सरोवर क्षेत्र में 19 प्रकार की मछलियां,11 प्रकार के सरीसृप, 13 स्तनपायी जानवर मिलने का पता चला है. इनमें से कुछ को घूमते हुए देखा भी जा सकता है. इन पक्षियों में हंस, सुर्खाब, रंग-बिरंगी बतखें, सारस, स्पूनबिल, राजहंस, किंगफिशर, प्रमुख हैं. इनकी बड़ी संख्या आपको सरोवर क्षेत्र में विचरित करती मिल जाएगी.

कई बार यहां पर ऐसे पक्षी भी देखे गए हैं जिनको दुर्लभ की श्रेणी में रखा गया है. नल के इर्द-गिर्द ऐसी गतिविधियों की इजाजत नहीं है जिनसे पक्षियों के विचरण में खलल पहुंचता हो. शोर न हो इसलिए सरोवर में मोटरबोट पूर्णतया प्रतिबंधित है. सरोवर की सैर के लिए यहां पर बांस के चप्पुओं से खेने वाली नावें सबसे उपयुक्त हैं जो हर वक्त उपलब्ध रहती है. ये नावें अलग-अलग क्षमता वाली होती है. जैसे ही आप सरोवर में आगे बढ़ते है दूर-दूर मेहमान पक्षी नजर आने लगते हैं. पानी के अन्दर झांकने पर तलहटी में मौजूद जलीय जीवन भी आप देख सकते हैं.

यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं और यहां के पक्षियों की हलचल को कैमरे में कैद करना चाहते हैं तो इसके लिए आवश्यक है कि आपके पास टैलीलेंस युक्त कैमरा होना आवश्यक है. पक्षियों को करीब से देखने के  लिए दूरबीन हो तो क्या बात है क्यूंकि पक्षी मनुष्य से कुछ दूरी बना कर रखते हैं. पर्यटक सरोवर के किनारे कुछ दूरी तक घुड़सवारी का आनंद भी ले सकते है.

कैसे जाएँ- नल सरोवर तक पहुंचने के लिए आपको अहमदाबाद पहुंचना होता है. अहमदाबाद पहुंचने के लिए आपको ज्यादा मशक्त नहीं करनी होती क्योंकि अहमदाबाद देश के कई नगरों से हवाई और रेल परिवहन माध्यम से जुड़ा हुआ है. नल सरोवर अहमदाबाद से 60 किलो मीटर की दुरी पर है. आप अहमदाबाद पहुंचते ही बस के माध्यम से 1.30 घंटे में जल सरोवर पहुंच जाते है. अभयारण्य की सीमा में गुजरात पर्यटन विकास निगम का एक गेस्ट हाउस है जो यहां पर एक रेस्तरां भी चलाता है. यहां पर रुक कर नल के शांत वातावरण का लुत्फ लिया जा सकता है.

एक दिन में यदि आप नल सरोवर के अलावा कुछ और देखना चाहते हों तो सरोवर की सैर के बाद 60 किमी दूर लोथल जा सकते है जहां सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष देखे जा सकते हैं और शाम में अहमदाबाद लौट सकते हैं. अहमदाबाद एक आधुनिक नगर है जहां हर श्रेणी के पर्यटक के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है. अहमदाबाद में रहकर कई स्थान देखे जा सकते हैं. गांधी जी के ऐतिहासिक आश्रम साबरमती के अलावा यहां अक्षरधाम मंदिर भी है. यदि गुजरात की मेहमानवाजी, वहां के भोजन व संस्कृति से रूबरू होने का आपके पास कम समय है तो रात्रि में विशाला जा सकते हैं जहां पर आपको एक परिसर में सब कुछ देखने को मिल जाएगा.


जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

नाहरगढ़ किला राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो दिखने में जितना अद्भुत है उतना ही विशाल भी। किले को जयसिंह द्वितीय ने सन् 1734 में बनवाया था। जो एक विशाल दीवार द्वारा जयगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। आमेर और जयगढ़ किले की ही तरह ये किला भी शहर की सुरक्षा का काम करता है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। और तो और कई मशहूर फिल्मों जैसे रंग दे बसंती और जोधा-अकबर फिल्मों के कई सीन यहां शूट हुए हैं।

नाहरगढ़ का शानदार किला

पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था जिसे बाद में बदलकर नाहरगढ़ रखा गया। महाराजा सवाई राम सिंह ने सन् 1868 में किले के अंदर भवनों का निर्माण और विस्तार करवाया था। रानियों के लिए अलग-अलग और बहुत ही सुंदर खंड हैं। नाहरगढ़ किले से पूरे शहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एडवेंचर पसंद हैं तो किले तक पहुंचने के लिए 2 किमी का ट्रैक भी कर सकते हैं।

नाहरगढ़ किले की बनावट

यह किला 700 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जिसकी वजह से आज तक इस पर कोई आक्रमण नहीं कर पाया। नाहरगढ़ की सबसे खूबसूरत जगह है माधवेंद्र भवन, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने डिज़ाइन किया था। भवन के अंदर आंतरिक साजसज्जा खूबसूरत भित्ति चित्रों और स्टको डिज़ाइन से की गई है। किले को शाही महिलाएं इस्तेमाल करती थी। किले में जनाना और मर्दाना महल का भी निर्माण करवाया गया था। 12 कमरों वाले माधवेंद्र भवन की खूबसूरती देखने लायक है। किले की आंतरिक साज सज्जा में भारतीय और यूरोपियन वास्तुकला का नायाब नमूना देखने को मिलता है। भवन में बने कक्ष गलियारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नाहरगढ़ किले की खूबसूरती रात के समय दोगुनी हो जाती है।

कब जाएं

नाहरगढ़ किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेस्ट होता है जब यहां का तापमान 20-24 डिग्री रहता है। ऐसे में आप आराम से किले की हर एक चीज़ को एन्जॉय कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

जयपुर लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है तो यहां तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कोई दिक्कत नहीं। घरेलू एयरपोर्ट यहां से 7 किमी दूर है तो वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी 10 किमी है। एयरपोर्ट पर टैक्सी और बसों की सुविधा अवेलेबल रहती है।

रेल मार्ग

जयपुर, गांधीनगर और दुर्गापुर ये तीन रेलवे स्टेशन हैं। स्टेशन पर मौजूद बसों और टैक्सी से आप आसानी से जहां तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

जयपुर के लिए राजस्थान परिवहन निगम की हर तरह की बसें अवेलेबल हैं। जिन्हें आप अपने कम्फर्ट के हिसाब से चुन सकते हैं।


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