ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए हुए है ‘पैठण’

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए हुए है ‘पैठण’

चौड़े पाट की गोदावरी नदी के तट पर बसा है पैठण। गोदावरी नदी को ससम्मान ‘दक्षिण की गंगा’ भी कहा जाता है। आप पैठण को गोदावरी का जलमग्न नेत्र भी कह सकते हैं, पवित्र पैठण की वह आंख, जिसमें बहती गोदावरी की जलधारा जैसे नदी का लहराता आंचल हो। इस प्राचीन नदी से मिलता-जुलता पैठण का इतिहास भी पुरातन है। महाराष्ट्र पैठण के बिना अधूरा है। औरंगाबाद जिले के दिल में बसा पैठण जिला मुख्यालय से तकरीबन 56 किमी. दूर है। यह छोटा-सा शहर कभी सातवाहन राजवंश की राजधानी रहा है।

संतों की भूमि

पैठण को ‘संतों की भूमि’ भी कहा जाता है। यह स्थान वैष्णववाद के निम्बार्क सम्प्रदाय परंपरा के संस्थापक श्री निम्बार्क का जन्मस्थान भी है। इस शहर को ‘दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र’ के लिए भी जाना जाता है। 20वें जैन तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ की काले रंग की सुंदर मूर्ति जैन मंदिर में स्थापित है, जो अर्द्धपद्मासन मुद्रा में साढ़े तीन फीट ऊंची मूलनायक प्रतिमा है। यहां हर अमावस्या को यात्रा एवं महामस्तक अभिषेक होता है। यह प्रतिमा राजा खरदूषण द्वारा निर्मित कराई गई है। अन्य मंदिरों में प्रतिमाएं पाषाण या धातुओं की होती है, पर यहां आपको बालू-रेती से बनी प्रतिमा देखने को मिलती है। यह शहर संत एकनाथ महाराज का भी निवास स्थान रहा, जिनकी समाधि यहां है। एकनाथ प्रसिद्ध मराठी संत थे, जिनका जन्म संत भानुदास के कुल में हुआ था। संत एकनाथ प्रवृत्ति और निवृत्ति का अनूठा समन्वय थे।

सबने पुकारा अपनी नजर से

ग्रीक लेखक एरियन ने पैठान को ‘प्लीथान’ कहा और भारत की यात्रा करने वाले मिस्त्र के रोमन भूगोलविद टॉलमी ने इसका नाम ‘बैथन’ लिखा है और इसे ‘सित्तेपोलोमेयोस’ (सातवाहन नरेश श्री पुलोमावी द्वितीय 138-170 ई.) की राजधानी बताया है। ‘पेरिप्लस ऑफ दि एरिथ्रियन सी’ के अज्ञात नाम लेखक ने इस नगर का नाम ‘पोथान’ लिखा है।

गौरवपूर्ण रहा है इतिहास

पुरातन पैठण की महिमा आपको पाणिनी की ‘अष्टाध्यायी’ में भी मिलेगी। यह स्थान योद्धाओं,संतों और सूफियों का संगम रहा है। सातवाहन वंश की राजधानी रहे पैठण पर प्रथम सातवाहन राजा ने राज्य किया और फिर साम्राज्य की सीमा आधे हिंदुस्तान तक जा पहुंची थी। फिर यह चालुक्य वंश के हाथ में भी गया। यादव वंश ने भी यहां राज्य किया। गोदावरी वैली सभ्यता के अतिरिक्त हिंदू, बौद्ध एवं जैन धर्म के लोग यहां आकर बसे। मुगल भी आए। 17वीं शताब्दी में मराठाओं ने पैठण के धार्मिक और आर्थिक उत्थान के बारे में सोचा। प्रतिष्ठान में स्थापित होने वाली आंध्र शाखा के नरेशों ने अपने नाम के आगे ‘आंध्रभृत्य’ विशेषण जोड़ा था। पुरातत्व संबंधी खोदाई में आंध्र नरेशों के सिक्के मिले हैं, जिन पर स्वास्तिक चिह्न अंकित हैं। मिट्टी की मूर्तियां, माला की गुरियां, हाथी दांत और शंख की बनी वस्तुएं और मकानों के खंडहर यहां मिले हैं।

धार्मिक पर्यटन के लिए चर्चित

देशभर से लोग तीर्थाटन के लिए पैठण आते हैं। पैठण का आदर तीर्थ स्थल के रूप में अधिक होता है। विदेशी पर्यटक भी यहां खूब आते हैं। धर्म-संस्कृति-सभ्यता-इतिहास के लिए पैठण उनके सामने खुली किताब की तरह है, इसीलिए वे अपने भ्रमण को स्टडी टूर की संज्ञा देते हैं। यहां गोकुल अष्टमी चाव से मनाई जाती है। दही-हांडी का इंतजार भी पूरे पैठण को साल भर होता है। महादेव के सिद्धेश्र्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर खास तौर से यात्रा होती है।

कैसे और कब?

पैठण से जुड़ने का सबसे सुलभ साधन बस सेवा है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट औरंगाबाद शहर में है। वैसे यहां सभी मौसमों में आया जा सकता है, पर सबसे बेहतर एकनाथ षष्ठी उत्सव का समय है, जिसका आयोजन मार्च के महीने में होता है। यह संत एकनाथ की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित होता है।


इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

कोरोनावायरस के नए वेरिएंट सी.1.2 के सामने आने के बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाले सभी भारत से बाहर के देशों से आने वाले पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें ये कहा है कि 3 सितंबर से यूके, यूरोप, मिड ईस्ट, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिंबॉब्वे से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी है। गौरतलब है कि नया कोविड वेरिएंट सी.1.2 पहली बार साउथ अफ्रीका में मिला था।

पुराने नियम खारिज

इस नए नियम के लागू होने के बाद से पुराने नियम रद्द हो जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज लगा होना और 65 साल से ज्यादा उम्र के वृद्धों को मिलने वाली छूट शामिल है। नए सर्क्युलर के मुताबिक, ट्रैवल करने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए क्वारंटाइन होने वाला नियम खत्म हो चुका है।

दूसरे देशों के यात्रियों को लानी होगी नेगेटिव रिपोर्ट

मुंबई एयरपोर्ट पर एक घंटे में कम से कम तीन यात्रियों की कोरोना जांच पूरी कर ली जाएगी।

ऊपर बताए गए देशों के अलावा अन्य देशों से आने वाले पैसेंजर्स को आने पर या कही और जाने वाले यात्रियों को 72 घंटे के अंदर का आरटी-पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना ही होगा। जिसके बाद ही पैसेंजर एयरपोर्ट से बाहर जा सकेगा।

ऐसे पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की पूरी व्यवस्था मौजूद होगी। वहां प्रतिघंटे 600 लोगों का टेस्ट किया जा सकता है।

दुनिया के इन देशों में मिला C.1.2 वैरिएंट

कोविड-19 के लिए WHO की टेक्निकल लीड मारिया वैन केरखोव ने मंगलवार को कहा कि C.1.2 वैरिएंट कम से कम 6 देशों में पाया गया है। WHO के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के रिसर्चर्स ने पहली बार 21 जुलाई को WHO वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप को C.1.2 वेरिएंट पर अपने रिजल्ट पेश किए थे। ये नया वेरिएंट पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। रिसर्चर ने मुताबिक C.1.2 वेरिएंट वुहान में जन्मे मूल वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है।