दिल्ली से ऋषिकेश का शानदार रोड ट्रिप

दिल्ली से ऋषिकेश का शानदार रोड ट्रिप

ऋषिकेश रोड ट्रिप के लिए वीकेंड रहेगा बेस्ट। क्योंकि दो दिन का समय काफी है शहर के हर एक नज़ारे को कैमरे और आंखों में कैद करने के लिए। शनिवार सुबह निकलकर आराम से शाम तक वहां पहुंच जाएंगे फिर रविवार दोपहर या शाम को निकलकर वापस दिल्ली पहुंचा जा सकता है।

ऋषिकेश, उत्तराखंड ही नहीं आसपास के बाकी शहरों से भी सड़कमार्ग से जुड़ा हुआ है। जहां के लिए नई दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद से बसों की सुविधा अवेलेबल है। लेकिन बेहतर होगा आप इस शॉर्ट ट्रिप को बाइक या कार से कवर करें। ऐसा इसलिए क्योंकि रास्ते में इतनी सारी चीज़ें देखने को मिलेंगी जिनका लुत्फ आप बस में बैठकर शायद न उठा पाएं।

ऋषिकेश जाने के लिए बेस्ट हैं दो रूट

पहला रूट

नई दिल्ली- मेरठ- मुजफ्फरनगर- रूड़की- हरिद्वार- ऋषिकेश NH 334 द्वारा

दूसरा रूट

नई दिल्ली- हापुड़- चांदपुर- नज़ीबाबाद- हरिद्वार- ऋषिकेश NH 9 द्वारा

अगर आप पहले रूट से जाएंगे तो ऋषिकेश पहुंचने में तकरीबन 6 घंटे का समय लगेगा। नई दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी 235 किमी है। रास्ता बहुत ही स्मूद है।

दूसरे रूट से जाने पर तकरीबन 7 घंटे का समय लगता है। NH 9 से नई दिल्ली और ऋषिकेश के बीच की दूरी 288 किमी है।

मेरठ से गुजरते हुए यहां सुबह-सुबह नाश्ता करना मिस न करें। पंजाबी ढ़ाबे के लज़ीज, गरमा-गरम पराठे आपका पेट जरूर भर देंगे मन नहीं।

पावन नगरी हरिद्वार पहुंचेंगे तो यहां की हर एक गली से खाने की खुशबू आती है। जहां रूककर आप कम पैसों में भी बहुत ही स्वादिष्ट खाना खा सकते हैं। हरिद्वार में मंदिरों की भरमार है और हर मंदिर एक अलग इतिहास और खासियत समेटे हुए है। यहां के घाट पर लोगों की भीड़भाड़ मिलेगी लेकिन लेकिन कहीं से भी वो आपका सुकून छीनते हुए नज़र नहीं आएंगे। गंगा आरती यहां का खास आकर्षण है। हरिद्वार से 25 किमी दूर ऋषिकेश पहुंचने में करीब-करीब 45-60 मिनट लगते हैं।

ऋषिकेश का शानदार सफर

ऋषिकेश, जहां आध्यात्म और एडवेंचर का अनोखा संगम है। हिमालय ट्रेकिंग करने वालों के लिए ऋषिकेश एक बेस कैंप की तरह है। यहां आने वाले टूरिस्ट्स का मकसद ही शांति और सुकून से कुछ पल बिताना होता है। इसी वजह से यहां आश्रम और मेडिटेशन सेंटर्स की भरमार है। सैलानियों और साधुओं से भरे हुए राम-लक्ष्मण झूले का शानदार व्यू और व्हाइट वॉटर में रिवर रॉफ्टिंग का मज़ा लेना बिल्कुल भी मिस करने वाला नहीं है।

आसपास घने जंगलों के बीच ड्राइव करते हुए आप ऋषिकेश की अलग-अलग जगहों को कवर कर सकते हैं। बिना किसी डेस्टिनेशन पर रूके यहां ऐसे भी ड्राइविंग को एन्जॉय किया जा सकता है। सीज़न कोई भी हो यहां का मौसम ज्यादातर खुशगवार ही होता है। मतलब आप यहां की प्लानिंग कभी भी कर सकते हैं।


इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

इंटरनेशनल पैसेंजर्स का कोरोना टेस्ट हुआ जरूरी, सी.1.2 वेरिएंट्स से निपटने की तैयारियां तेज

कोरोनावायरस के नए वेरिएंट सी.1.2 के सामने आने के बाद मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाले सभी भारत से बाहर के देशों से आने वाले पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी किया है जिसमें ये कहा है कि 3 सितंबर से यूके, यूरोप, मिड ईस्ट, साउथ अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरिशस, न्यूजीलैंड, जिंबॉब्वे से मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी है। गौरतलब है कि नया कोविड वेरिएंट सी.1.2 पहली बार साउथ अफ्रीका में मिला था।

पुराने नियम खारिज

इस नए नियम के लागू होने के बाद से पुराने नियम रद्द हो जाएंगे, जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज लगा होना और 65 साल से ज्यादा उम्र के वृद्धों को मिलने वाली छूट शामिल है। नए सर्क्युलर के मुताबिक, ट्रैवल करने वाले इंटरनेशनल पैसेंजर्स के लिए क्वारंटाइन होने वाला नियम खत्म हो चुका है।

दूसरे देशों के यात्रियों को लानी होगी नेगेटिव रिपोर्ट

मुंबई एयरपोर्ट पर एक घंटे में कम से कम तीन यात्रियों की कोरोना जांच पूरी कर ली जाएगी।

ऊपर बताए गए देशों के अलावा अन्य देशों से आने वाले पैसेंजर्स को आने पर या कही और जाने वाले यात्रियों को 72 घंटे के अंदर का आरटी-पीसीआर टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना ही होगा। जिसके बाद ही पैसेंजर एयरपोर्ट से बाहर जा सकेगा।

ऐसे पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, एयरपोर्ट पर आरटी-पीसीआर टेस्ट की पूरी व्यवस्था मौजूद होगी। वहां प्रतिघंटे 600 लोगों का टेस्ट किया जा सकता है।

दुनिया के इन देशों में मिला C.1.2 वैरिएंट

कोविड-19 के लिए WHO की टेक्निकल लीड मारिया वैन केरखोव ने मंगलवार को कहा कि C.1.2 वैरिएंट कम से कम 6 देशों में पाया गया है। WHO के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के रिसर्चर्स ने पहली बार 21 जुलाई को WHO वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप को C.1.2 वेरिएंट पर अपने रिजल्ट पेश किए थे। ये नया वेरिएंट पहली बार मई में दक्षिण अफ्रीका में देखा गया था। रिसर्चर ने मुताबिक C.1.2 वेरिएंट वुहान में जन्मे मूल वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है।