वीकेंड हॉलिडे मनाने के लिए दिल्ली के आसपास ये हैं परफेक्ट डेस्टिनेशन

वीकेंड हॉलिडे मनाने के लिए दिल्ली के आसपास ये हैं परफेक्ट डेस्टिनेशन

लॉन्ग ड्राइव का हर कोई शौक़ीन होता है। इसके लिए लोग परफेक्ट डेस्टिनेशन की तलाश में रहते हैं। इस बारे में लोगों का कहना होता है कि लॉन्ग ड्राइव सभ्यता और संस्कृति से रूबरू होने का मौका देता है। हालांकि, ड्राइव कुछ घंटों का होना चाहिए। इसके चलते लोग अपने आसपास के शहरों की ट्रैवलिंग करना पसंद करते हैं। अगर आप भी ऐसी जगहों की तलाश में हैं। जहां आप महज कुछ घंटों की ड्राइव पर पहुंच जाएं, तो आप राजस्थान में वीकेंड हॉलिडे मना सकते हैं। राजस्थान में कई ऐसे शहर हैं, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। आइए जानते हैं-

जयपुर

जयपुर पिंक सिटी के नाम से दुनियाभर में पॉपुलर है। दिल्ली के आसपास यह परफेक्ट डेस्टिनेशन है। आमेर किला, नाहरगढ़ किला, जंतर मंतर, सिटी पैलेस, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम, जौहरी बाजार समेत कई ऐतिहासिक स्थल हैं। इन जगहों पर वीकेंड हॉलिडे मना सकते हैं।

अलवर

लॉन्ग ड्राइव पर जाना चाहते हैं, तो अलवर की यात्रा कर सकते हैं। दिल्ली से अलवर की दूरी 167 किलोमीटर है। पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। दिल्ली और उसके आसपास के पर्यटकों के लिए अलवर स्थित नीमराना पैलेस हॉलिडे स्पॉट के लिए पॉपुलर है। इस शहर में बाला किला भी है, जिसे अलवर किला भी कहा जाता है। राजा बख्तावर सिंह ने अलवर की सिटी पैलेस उर्फ ​​विनय विलास महल का निर्माण करवाया था। यह भी आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा, अलवर की अरावली पहाड़ियों में सरिस्का टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान है, जो शहर से महज कुछ दूर पर  है। साथ ही  भानगढ़ किला भी है, जिसे हॉंटेड प्लेस भी कहा जाता है। आप इन जगहों पर जा सकते हैं।


भरतपुर

भरतपुर को राजस्थान का पूर्वोत्तर का द्वार कहा जाता है। देश की राजधानी दिल्ली से भरतपुर की दूरी 185 किलोमीटर है। इस शहर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे यूनेस्को से विश्व धरोहर का मान्यता प्राप्त है। यह शहर बाणगंगा और गंभीर नदियों के संगम पर स्थित है।

पुष्कर

दिल्ली से पुष्कर की दूरी 148 किलोमीटर है। पर्यटक जयपुर जाने के बाद पुष्कर जरूर जाते हैं। पुष्कर विश्व में इकलौता स्थान है। जहां, भगवान ब्रह्मा जी का मंदिर है। पुष्कर 52 घाटों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन घाटों पर धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं। इसके अलावा, पुष्कर में आप स्ट्रीट शॉपिंग और कैमल राइडिंग भी कर सकते हैं। पुष्कर में पूर्णिमा और दिवाली के दिन कैमल फेयर (ऊंट मेला) का आयोजन किया जाता है।


जानिए, मीठे से लेकर तीखे तक की यहां मिलेगी ढेरों वैराइटी, मिस न करें महाराष्ट्र के ये जायके

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खाने की बात आए तो इंडिया की हर एक जगह अपनी कुछ न कुछ खासियत बटोरे हुए है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर एक जगह का खानपान अलग होने के साथ ही इतना खास है कि एक बार खाने के बाद आप उसे भूल नहीं पाएंगे। महाराष्ट्र का खानपान भी कुछ ऐसा ही नहीं। यहां की ज्यादातर डिशेज़ स्वाद में खट्टी-मीठी होती हैं जो लोगों को बहुत पसंद आती हैं। पोहा या हो मिसल पाव या फिर रगड़ा पेटीज़, इनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप गुजरात, लखनऊ और दिल्ली आकर भी देख सकते हैं। तो एक नज़र डालेंगे यहां के जायकों पर।कढ़ी

कढ़ी, महाराष्ट्रियन खानपान का बहुत ही खास हिस्सा है। जिसकी ग्रेवी काबुली चने से तैयार की जाती है और कई सारे सब्जियों को मिलाकर बनता है इसका पकौड़ा। ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें दही मिक्स किया जाता है। स्वाद के लिहाज से ही नहीं, इस डिश को गर्मियों में लोग हेल्दी रहने के लिए भी खाते हैं। कढ़ी के साथ चावल परोसा जाता है लेकिन कुछ लोग इसे मूंगदाल खिचड़ी के साथ भी एन्जॉय करते हैं। 

बासुंदी

ये एक स्वीट डिश है। इसमें दूध को धीमी आंच पर बहुत देर तक पकाया जाता है जब तक कि वो आधा न रह जाए। इसके बाद इसमें चीनी, इलायची और केसर मिक्स किया जाता है जो इसका स्वाद दोगुना कर देता है। वैसे इसे और भी कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें कस्टर्ड एप्पल बासुंदी और अंगूर बासुंदी बहुत मशहूर है।

महाराष्ट्रियन दाल

महाराष्ट्र में बनने वाली इस दाल की दूर तक फैली खुशबू ही भूख को बढ़ाने के लिए काफी होती है। खासतौर से विदर्भ में बनने वाली इस दाल को अब गोवा और कर्नाटक में भी बहुत चाव के साथ बनाया और खाया जाता है। इसे एक या दो नहीं बल्कि 51 अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है। जो सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। 

पिठला भाखरी

यहां इसे किसानों का खाना कहते हैं। इसे बनाने में न ही बहुत ज्यादा चीज़ों की जरूरत होती है और न ही समय की। पिठला को चावल के साथ सर्व किया जाता है जो थोड़ा लिक्विड रूप में होता है। ड्राय पिठला रोटी के साथ बहुत ही अच्छा लगता है।

पोहा

सुबह हो या शाम नाश्ते में सर्व करने के लिए पोहा है परफेक्ट डिश। पोहे को कई तरीकों से बनाया जाता है जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर है कांदा पोहा, जिसे बहुत सारे प्याज के साथ बनाया जाता है।  इसके अलावा बटाटा पोहा जिसमें आलू के टुकड़े होते हैं। एक और दूसरे तरह का पोहा जिसे नारियल, हरी मिर्च, अदरक और नींबू के रस से बनाया जाता है। सुबह होते ही यहां के दुकानों पर पोहा बनना शुरू हो जाता है। जो लाइट और हेल्दी होता है।

भारली वांगी

वैसे तो ये भरवां बैगन होते हैं लेकिन इन्हें बनाने का तरीका और स्वाद काफी अलग होता है। नारियल, प्याज, गुड़ और मराठी मसाले से तैयार होता है इसका भरावन। बैंगन का स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता लेकिन भारली वांगी का स्वाद चखने के बाद आप इसे भूल नहीं पाएंगे।

रगड़ा पेटिस

ये महाराष्ट्र का बहुत ही मशहूर स्ट्रीट फूड है। सूखी मटर से बनने वाली रगड़ा ग्रेवी को चटनी, बारीक कटे प्याज, टमाटर, सेव और हरी धनिया के साथ सजाकर परोसा जाता है। स्ट्रीट फूड के अलावा आप बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स में भी इसका स्वाद ले सकते हैं। 

मिसल पाव

मिसल पाव भी यहां नाश्ते में सर्व की जाने वाली डिश है। महाराष्ट्र के अलावा पुणे और मुंबई के लोगों की भी पसंदीदा डिश में शामिल है मिसल पाव। चटपटी और मसालेदार सब्जी को पाव के साथ परोसा जाता है। मिसल को स्वाद और पसंद के हिसाब से कई तरीकों से बनाया जाता है। पुनेरी मिसल, नागपुरी मिसल, कोल्हापुरी मिस और मुंबई मिसल उनमें से एक है।

पूरन पोली

अगर आपको पराठे खाना पसंद हैं तो महाराष्ट्र आकर पूरन पोली का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। जिसमें गुड़, चना दाल, इलायची की स्टफिंग होती है। त्योहार और उत्सवों में बनने वाली इस डिश को नाश्ते से लेकर लंच या डिनर में कभी भी खाया जा सकता है।    

 तो महाराष्ट्र के खूबसूरत नजारे देखने के साथ ही यहां के जायकों को चखना बिल्कुल न भूलें खासतौर से स्ट्रीट फूड्स को क्योंकि ये रेस्टोरेंट के मुकाबले कहीं अधिक स्वादिष्ट होते हैं।