ये शहर महिला टूरिस्ट के लिए सुरक्षित

ये शहर महिला टूरिस्ट के लिए सुरक्षित

घूमने का शौक रखने वाले किसी पर्यटन स्थल पर जाने से पहले कुछ बातों को सुनिश्चित जरूर करना चाहते हैं, जिनमें सबसे पहले आता है महिलाओं की सुरक्षा. चाहे महिला परिवार के साथ जाये या अकेले  घूमने का शौक रखती हो,महिलाओं की सुरक्षा पहला विचार होता है. हमारे देश में कई ऐसे शहर है जो महिला पर्यटकों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं. जंहा पर अकेली महिला पर्यटक भी बिना किसी दिक्कत के यात्रा कर सकती है.

खजुराहो- यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल खजुराहो के मंदिर की खूबसूरती वाकई देखने वाली है. यहां टूरिस्ट गाइड से बचने के लिए आपको ट्रिक्स आनी चाहिए वरना ये अच्छे खासे पैसे वसूलते हैं इन मंदिरों के सैर कराने की. लक्ष्मण मंदिर, लक्ष्मी मंदिर, मातंगेश्वर महादेव मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर और आदिनाथ मंदिर बहुत ही खूबसूरत है.

लद्दाख- लद्दाख हिमालयी दर्रो की धरती है. उत्तर में काराकोरम पर्वत श्रंखला और दक्षिण में हिमालय से घिरे इस इलाके में आबादी का घनत्व बहुत कम है. इसकी दुर्गमता का आलम यह है कि इसके पूर्व में दुनिया की छत कहा जाने वाला तिब्बत, उत्तर में मध्य एशिया, पश्चिम में कश्मीर और दक्षिण में लाहौल-स्पीति घाटियां हैं. अपने अनूठे प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लद्दाख बेमिसाल है.

यहॉ बौद्ध संस्कृति की स्थापना दूसरी सदी में ही हो गई थी. इसीलिए इसे मिनी तिब्बत भी कहा जाता है. लद्दाख की ऊंचाई कारगिल में 9000 फुट से लेकर काराकोरम में 25000 फुट तक है. यह सोलो ट्रेवलिंग के लिए सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है और जहां तक संभव हो यहां अकेले ही जाना चाहिए. बाइकर्स के कई ग्रुप तो कहीं अकेले यात्रा करते लोग भी आपको यहां मिल जाएंगे. मगर यहां अकेले जाने से पहले एक बात का जरूर ध्यान रखें कि यहां से जुड़ी हर जानकारी पहले से जुटा लें. यहां के स्थानीय लोग भी पर्यटकों के लिए बहुत मददगार होते हैं.


 
उदयपुर- राजस्थान का एक शहर उदयपुर प्रकृति एवं मानवीय रचनाओं से समृद्ध अपने सौंदर्य के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां की हवेलियों और महलों की भव्यता को देखकर दुनिया भर के पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. यहां के लोग, उनका व्यवहार, यहां की संस्कृति, लोक गीत, लोक-नृत्य, पहनावे, उत्सव एवं त्योहारों में ऐसा आकर्षण है कि देशी-विदेशी पर्यटक, फोटोग्राफर, लेखक, फिल्मकार, कलाकर, व्यावसायी सभी यहां खिंचे चले आते हैं.


 
अपनी पुरानी राजधानी चित्तौड़गढ़ पर मुगलों के लगातार आक्रमण से परेशान होकर महाराणा उदय सिंह ने पिछौला झील के तट पर अपनी राजधानी बनाई जिसे उदयपुर नाम दिया गया. राजस्थान के लोगों की खास बात होती है कि वो बहुत फ्रेंडली और हेल्पफुल नेचर के होते हैं और उदयपुर में ऐसे लोगों की कमी नहीं. बस उदयपुर की एक बात आपको बोर कर सकती है वो ये कि यहां की ज्यादातर जगहें कपल डेस्टिनेशन के तौर पर जानी जाती है तो अकेले वहां जाना थोड़ा अजीब लग सकता है. लेकिन अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो बिना किसी फ्रिक के यहां एक्सप्लोर कर सकते हैं.


 
नैनीताल- नैनीताल को भारत का झीलों वाला कस्बा भी कहा जाता है. यह हिमालयन बेल्ट में स्थित है. यह कुमाऊँ की पहाड़ियों के मध्य में स्थित है और इसे खूबसूरत झीलों का आशीर्वाद प्राप्त है. नैनीताल को श्री स्कन्द पुराण के मानस खंड में ‘तीन संतों की झील’ या ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ के रूप में उल्लेखित किया गया है. उत्तराखंड की ये जगह अपनी प्रकृति की खूबसूरती के साथ यहां के लोगों की खास आवभगत और दोस्ती भरे मिजाज के लिए जानी जाती है. इस कारण से ही देश के अनेक स्थानों से आने वाली लड़कियों या महिलाओं के अकेले घूमने के लिए यह बेहतर जगह है. यहां लोगों की अच्छी-खासी तादाद मिल जाती है, जिससे आप अकेला तो कभी भी महसूस नहीं कर सकती हैं.


 
मैसूर- भारत के सबसे सुंदर शहरों में एक कर्नाटक की राजधानी बंगलौर से महज 140 किमी की दूरी पर स्थित मैसूर एक ऐसा स्थान है जो एक बार देख लेने के बाद बार-बार याद आता है. चंदन की खुशबू से महकते इस शहर में चमेली, मोगरा, गुलाब की सुगंध इस तरह समाई है कि जो भी यहां आए सराबोर हो जाए. राजमहल, चंदन, चामुंडी हिल्स, अगरबत्तियां, इत्र व वृन्दावन गार्डन्स इतना कुछ यहां है कि सबके बारे में लिख पाना बहुत मुश्किल है. इस तरह मैसूर सिर्फ देखने की नहीं, बल्कि रच-बस जाने लायक शहर है. मैसूर के चंदन से बनी छोटी-बड़ी चीजें, अगरबत्तियां व महकदार साबुन विश्व भर में प्रसिद्ध हैं. अगर आप प्राचीन इमारतों व इतिहास की शौकीन हैं तो ये जगह आपके लिए परफेक्ट रहेगी. यहां समय-समय पर कई राजाओं का शासन रहा, जिस कारण यहां किले आज भी जीवित हैं. यहां के लोगों का दोस्ताना व्यवहार आपकी यात्रा को सुखद और आसान बना देता है.


 
शिमला- हिल स्टेशन टूरिस्टों की सबसे फेवरेट जगह होते हैं और लगभग पूरे साल यहां आनों वालों की भीड़ लगी रहती है इसलिए ये जगह महिलाओं की लिए ज्यादा सुरक्षित होते हैं. शिमला ऐसी ही जगहों में से एक है जहां देखनेयहां आनों वालों की भीड़ लगी रहती है इसलिए ये महिलाओं की लिए ज्यादा सुरक् के लिए कई सारी जगहें हैं. सबसे अच्छी और खास बात इन जगहों की होती है कि यहां देर रात को भी सैलानियों को घूमते, खाते-पीते, मौज-मस्ती करते हुए देखा जा सकता है.

सिक्किम- सिक्किम को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है और प्रकृति के वरदान से भरी यह जादुई जगह हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है. ऐसी कई जगहों में यह जगह भी कई महत्वपूर्ण स्थानों के लिए मशहूर है और यह कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में आप यहाँ नहीं गए तो आपने कुछ खोया है. नार्थ ईस्ट की ज्यादातर जगहें आपको अट्रैक्ट करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगी खासतौर से सिक्किम. चारों ओर ऊंची-ऊंची पहाड़ियां, गहरी घाटियां और बौद्ध मोनेस्ट्रीज यहां की खूबसूरती को दोगुना करते हैं. यहां के लोग बहुत ही फ्रेंडली होती है इसलिए यहां महिलाएं बेफ्रिक होकर ट्रिप को एन्जॉय कर सकती है. यहां खाने-पीने के भी ढेरों ऑप्शन्स मौजूद हैं.


 
काजीरंगा- महिलाओं के लिए आसाम के काजीरंगा नेशनल पार्क में घूमना बहुत ही यादगार और शानदार ट्रिप साबित हो सकता है. वाइल्ड लाइफ का एक्सपीरियंस लेने के साथ ही अगर इसे एन्जॉय भी करना है तो काजीरंगा का रूख करें जहां प्राइवेट जीप और हाथियों पर सफारी की जा सकती है. अकेले घूमना हो या ग्रूप, महिलाओं के लिए हर लिहाज से सेफ है.


इस जलेबी का स्वाद लंबे अर्से तक रह जाएगा याद

इस जलेबी का स्वाद लंबे अर्से तक रह जाएगा याद

यहां आकर अपने आप मुंह से यही निकलता है। इनका साइज़ ही है इतना बड़ा। सिर्फ एक जलेबी काफी है अंदर तक घुली चाशनी और देसी घी की खुशबू देर तक मुंह का स्वाद बरकरार रखने के लिए। चाहे सिंपल खाएं या रबड़ी के साथ, यह स्वाद आपको लंबे अर्से तक याद रह जाएगा। दोने में रखी एक सादी जलेबी है लगभग 100 ग्राम वजन की, जिसका मूल्य है 50 रुपए, जबकि रबड़ी के साथ इसकी कीमत है 75 रुपए।

स्वाद का सीक्रेट

बहुत पुराना है स्वाद का यह ठिकाना...ऊपर बोर्ड लगा है ओल्ड फेमस जलेबी वाला और स्थापना वर्ष है 1884, पिछली चार पीढ़ियों से यह जगह और यह स्वाद कायम है। बड़े कड़ाहे में छनती बड़ी-बड़ी जलेबियां और बगल में एक कड़ाही में तले जाते समोसे, एक तरफ रखी रबड़ी, चारों ओर फैली घी की खुशबू। खुशबू और स्वाद की खास वजह है शुद्ध देसी घी और देसी खांडसारी चीनी।

ऐसे हुई स्थापना

जलेबी की इस दुकान की स्थापना की थी स्व. लाला नेम चंद जैन ने। बताया जाता है कि वो आगरा से 1884 में मात्र 2 रूपए लेकर दिल्ली आ गए थे। इसी पैसे से उन्होंने अपना छोटा सा कारोबार शुरू किया और आज यहां तक पहुंच गए। जलेबी का यह स्वाद पाने तक उन्होंने कई तरीके आजमाए, इंग्रेडिएंट्स में बदलाव किया, तब जाकर यह स्वाद मिला, जो आज लोगों की जुबान पर चढ़ कर बोल रहा है। आज यह तो नहीं है लेकिन उनकी भावी पीढ़ियां स्वाद की इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। 

चर्चे इनके दूर-दूर तक 

इन जलेबियों का स्वाद दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। चौथी पीढ़ी तक पहुंचते-पहुंचते यह देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। लोग इन्हें शादी-ब्याह के ऑर्डर देते हैं। दिल्ली घूमने वाले भी यहां आते हैं। देश के बाहर भी यूएस, यूके, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और केनेडा तक इस स्वाद की धमक पहुंची है। मशहूर राजनीतिज्ञों से लेकर फिल्म स्टॉर्स तक इन जलेबियों का स्वाद लेने लाल किले के पास बनी इस दुकान तक पहुंचते हैं। स्वाद का यह ठिकाना राजनैतिक मतभेदों और धार्मिक मतभेदों से दूर है। हर वर्ग, जाति, धर्म और राजनीतिक दल के लोग इस स्वाद के मुरीद हैं। 


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