ये है दुनिया के 5 सबसे अजीबो-गरीब पेड़, जिनके पीछे छुपा है गहरा रहस्य

ये है दुनिया के 5 सबसे अजीबो-गरीब पेड़, जिनके पीछे छुपा है गहरा रहस्य

यूं तो आपने अलग-अलग खासियत वाले कई पेड़ देखे होंगे, कोई सबसे पुराना है तो कोई अजीबोगरीब आकृति वाला। दुनिया में रहस्य और विचित्र तरह के पेड़ पाए जाते है। जिनके बारे में शायद ही सब लोगो को पता हो। संपूर्ण दुनिया में चमत्कारिक, रहस्यमी और विचित्र तरह के पेड़, पौधे और लताएं हैं। हम आपको बताना चाहेंगे ऐसे वृक्षों के बारे में जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इनकी विचित्रता के कारण ही ये विश्व प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको दुनिया के सबसे विचित्र पेड़ों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में जानकर आप भी आश्चर्यचकित रह जाएंगे।

* चमत्कारिक बरगद का पेड़ :
यह पेड़ आंध्रप्रदेश के नालगोंडा में स्थित है। इसकी खास बात ये है कि इस पर विभिन्न जानवरों की आकृतियां पायी जाती है। बिच्छू, सांप, अजगर, मगरमच्छ, शेर जैसे पशु और पक्षियों की आकृतियां संपूर्ण वृक्ष पर बनी हुई है। वहां के लोगों का मानना है कि इस पेड़ के तनों पर किसी ने इन कलाकृतियों को गढ़ा है। उनका मानना है कि यह पेड़ कोई से चमत्कार नहीं है। जिस तरह इस पेड़ पर आकृतियां बनी हुई है उस तरह से इसे कोई बना नहीं सकता। इसकी जड़े, लताएं और तना सभी आकृतियों में ढली हुई है।

* बोतल पेड़ :
यह पेड़ नामीबिया में बना है और यह धरती के सबसे घातक पेड़ों की गिनती में आता है। इस पेड़ से निकलने वाला दूधिया रस बहुत ही जहरीला होता है। पुराने समय में तो इस पेड़ को शिकारी अपना शिकार करने के काम में भी लेते थे। शिकारी इसके जहरीले दूधिया रस को अपने तीर पर लगाकर शिकारी को निशाना बनाते थे

* बाओबाब के पेड़ :
यह पेड़ मेडागास्कर, अफ्रीका में पाए जाते हैं। इसे हिन्दी में गोरक्षी कहते हैं। बाओबाब वृक्ष की सबसे पहली पहचान है इसका उल्टा दिखना इसका मतलब इसको देखने पर आभास होता है कि मानों पेड़ की जड़े ऊपर और तना नीचे हो। इस पेड़ पर साल के 6 माह पत्ते लगे रहते हैं और बाकी छह माह यह पेड़ एक ठूंठ की भांति दिखाई देता है।

* ड्रैगन ट्री :
ड्रैगन वृक्ष को जीवित जीवाश्म इसीलिए माना जाता है, क्योंकि जब इसे काटा जाता है तो इसमें से खून की तरह लाल रंग का रस निकलता है। इस वृक्ष का आधार चौड़ा, मध्य भाग संकरा और ऊपर का भाग किसी छतरी की तरह तना हुआ है। इसी कारण यह भाग ऐसा लगता है कि सैंकड़ों पेड़ उगकर एकसाथ बंध गए हो। अफ्रीका के उत्तरी पश्चिमी तट पर कैनरी आयलैंड स्थित है, इस वृक्ष को देखने के लिए विश्वभर से लोग आते हैं।

* एंजेल ओक :
दक्षिण कैरोलिना में एंजेल ओक ट्री चार्ल्सटन के पास जॉन्स द्वीप के एंजेल ओक पार्क के लाइव ओक में स्थित हैं। माना जाता है कि यह वृक्ष 300 से 400 वर्ष पुराना है। इसकी ऊंचाई 66.5 फुट और चौड़ाई 25.5 फुट है। इस वृक्ष को देखना भी बहुत ही अद्भुत है।


जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

जयपुर की शान है खूबसूरत नाहरगढ़ किला है, एक बार ज़रूर जाये

नाहरगढ़ किला राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। जो दिखने में जितना अद्भुत है उतना ही विशाल भी। किले को जयसिंह द्वितीय ने सन् 1734 में बनवाया था। जो एक विशाल दीवार द्वारा जयगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। आमेर और जयगढ़ किले की ही तरह ये किला भी शहर की सुरक्षा का काम करता है। इसे देखने के लिए सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है। और तो और कई मशहूर फिल्मों जैसे रंग दे बसंती और जोधा-अकबर फिल्मों के कई सीन यहां शूट हुए हैं।

नाहरगढ़ का शानदार किला

पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था जिसे बाद में बदलकर नाहरगढ़ रखा गया। महाराजा सवाई राम सिंह ने सन् 1868 में किले के अंदर भवनों का निर्माण और विस्तार करवाया था। रानियों के लिए अलग-अलग और बहुत ही सुंदर खंड हैं। नाहरगढ़ किले से पूरे शहर का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। अगर आप एडवेंचर पसंद हैं तो किले तक पहुंचने के लिए 2 किमी का ट्रैक भी कर सकते हैं।

नाहरगढ़ किले की बनावट

यह किला 700 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जिसकी वजह से आज तक इस पर कोई आक्रमण नहीं कर पाया। नाहरगढ़ की सबसे खूबसूरत जगह है माधवेंद्र भवन, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने डिज़ाइन किया था। भवन के अंदर आंतरिक साजसज्जा खूबसूरत भित्ति चित्रों और स्टको डिज़ाइन से की गई है। किले को शाही महिलाएं इस्तेमाल करती थी। किले में जनाना और मर्दाना महल का भी निर्माण करवाया गया था। 12 कमरों वाले माधवेंद्र भवन की खूबसूरती देखने लायक है। किले की आंतरिक साज सज्जा में भारतीय और यूरोपियन वास्तुकला का नायाब नमूना देखने को मिलता है। भवन में बने कक्ष गलियारों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। नाहरगढ़ किले की खूबसूरती रात के समय दोगुनी हो जाती है।

कब जाएं

नाहरगढ़ किला घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे बेस्ट होता है जब यहां का तापमान 20-24 डिग्री रहता है। ऐसे में आप आराम से किले की हर एक चीज़ को एन्जॉय कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग

जयपुर लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है तो यहां तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की कोई दिक्कत नहीं। घरेलू एयरपोर्ट यहां से 7 किमी दूर है तो वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी 10 किमी है। एयरपोर्ट पर टैक्सी और बसों की सुविधा अवेलेबल रहती है।

रेल मार्ग

जयपुर, गांधीनगर और दुर्गापुर ये तीन रेलवे स्टेशन हैं। स्टेशन पर मौजूद बसों और टैक्सी से आप आसानी से जहां तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

जयपुर के लिए राजस्थान परिवहन निगम की हर तरह की बसें अवेलेबल हैं। जिन्हें आप अपने कम्फर्ट के हिसाब से चुन सकते हैं।


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