उत्तर प्रदेश के किसानों को 'सम्मान निधि योजना’ का सर्वाधिक लाभ

उत्तर प्रदेश के किसानों को 'सम्मान निधि योजना’ का सर्वाधिक लाभ

लखनऊ। ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ का सर्वाधिक लाभ उत्तर प्रदेश के किसानों को मिला है। अभी 25 दिसम्बर को ही 1 लाख 62 हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में भेजे गए हैं। इस योजना से उत्तर प्रदेश के 2 करोड़ 30 लाख किसानों को फायदा पहुंच रहा है। इस योजना के तहत अब तक कुल सात किस्तें जारी की जा चुकी हैं। सभी सातों किस्तों को मिलकर अब तक 27,101 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस योजना के तहत प्रत्येक किसानों के बैंक खातों में सालाना 6 हजार रुपये भेजे जाते हैं। यह राशि प्रदेश के 2 करोड़ 30 लाख किसानों के खातों में जा रहा है।

किसानों के हित की इस बेहद महत्वाकांक्षी किसान सम्मान निधि योजना पर हर साल केंद्र सरकार को 75,000 करोड़ रुपये खर्च करने होते हैं। उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है। यहां के अधिकांश लोगों की रोजी-रोटी का यह महत्वपूर्ण जरिया है। स्वाभाविक रूप से किसानों की संख्या भी सर्वाधिक है। लिहाजा इस योजना का सर्वाधिक लाभ भी उत्तर प्रदेश को मिला है। अब तक सात किश्तों के जरिए राज्य के 2 करोड़ 30 लाकह किसानों को दो-दो हजार की सात किश्तों में 27,101 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।

केंद्र सरकार इस योजना के तहत हर पात्र किसानों को दो-दो हजार रुपये की बराबर किश्तों में साल भर में 6,000 रुपये देती है। यह पैसा ऐसे समय दिया जाता है, जब रबी, खरीफ और जायद की फसलों में कृषि निवेश के लिए किसानों को इसकी बेहद जरूरत होती है। योजना की घोषणा वर्ष 2019 में हुई थी। दिसंबर 2019 से यह लागू है। ये पैसे किसानों को तीन किस्तों में दिए जाते हैं। हर किस्त में किसानों को 2000 रुपये मिलते हैं। यह पैसा सीधे किसानों के अकाउंट्स में भेजा जाता है। राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रदेश उन किसान परिवारों की पहचान करते हैं, जो योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पाने के पात्र हैं।

86 लाख किसानों का 1 लाख रुपये तक का ऋणमोचन

उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग कृषि से जुड़े हैं। आधुनिकतम सुविधाएं न होने और मौसम पर अधिक निर्भरता के कारण कई बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यह भारी कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। कई बार इनके आत्महत्या करने की खबरें भी सुनाई देती हैं। ऐसे ही किसानों की मदद के लिए योगी अदित्यनाथ सरकार सामने आई। किसानों की मदद के लिए राज्य में किसान ऋण मोचन योजना चलाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना पहला बजट पेश करते ही इस योजना का एलान कर दिया था। प्रदेश के 86 लाख से ज्यादा किसानों को इस योजना का लाभ पहुंचाकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना वादा निभाया। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के 16 दिन बाद ही योगी आदित्यनाथ सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग हुई। इस प्रथम कैबिनेट बैठक में ही प्रदेश के 92.5 फीसदी यानी 86 लाख लघु और सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया गया। सरकार ने 30,729 करोड़ किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ किया है। इन किसानों पर अधिकतम एक लाख रुपये तक का कर्ज है। 7 लाख किसानों का लोन जो एनपीए बन गया है, वो भी माफ किया गया है। इन 7 लाख किसानों पर तकरीबन 5,630 करोड़ रुपये का एनपीए था, जो माफ किया गया है। सरकार ने कुल मिलाकर 36 हजार 359 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया है।

कृषि एवं किसान कल्याण

साढ़े तीन वर्षों में 2.52 लाख करोड़ रुपये का नकद भुगतान
36 हजार करोड़ रुपये से 86 लाख किसानों का ऋण मोचन
2.30 करोड़ किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि से लाभान्वित
27,101 करोड़ रुपये पीएम सम्मान निधि के तहत भेजा गया
'उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग' का किया गया गठन
कृषि निवेशों पर देय 1,222 करोड़ रुपए का अनुदान
55 लाख किसानों को 'द मिलियन फार्मर्स स्कूल' में प्रशिक्षण
1.56 करोड़ से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड वितरित
मुख्यमंत्री कृषक योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का प्रावधान
4 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को वितरित
2019-20 में 231.33 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण
गोवंश आधारित जीरो बजट खेती को मिला प्रोत्साहन
भदोही और गोरखपुर में बनेगा वैटेनरी विश्वविद्यालय
प्रदेश सरकार को मिले कृषि कर्मण पुरस्कार
20 नए कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना
ई-उपार्जन पोर्टल पर दो लाख किसानों का पंजीयन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 6.18 करोड़ किसान पंजीकृत
किसानों को कृषक कल्याण दुर्घटना बीमा का लाभ
20.80 लाख किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ
1862.46 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्षतिपूर्ति
सरकारी कृषि उपज खरीद एवं भंडारण क्षमता में विस्तार

एमएसपी के तहत रिकार्ड खरीद 60 हजार करोड़ का भुगतान
4,287 से अधिक धान क्रय केंद्रों की स्थापना, 72 घंटों में भुगतान
धान एमएसपी में डेढ़ गुना वृद्धि, सामान्य 1868 और ग्रेड ए-1888
205 लाख मीट्रिक टन धान खरीद, हर साल बढ़ाया गया लक्ष्य
183.62 लाख मीट्रिक टन हुई अब तक धान खरीद (*17 दिसंबर)
31910 करोड़ रुपये धान किसानों को हुआ भुगतान (*14 दिसंबर)
25,29,760 किसान हुए सरकारी धान खरीद योजना से लाभान्वित
गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई डेढ़ गुना की बढोत्तरी
162.71 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की सरकारी खरीद
5896 क्रय केंद्रों पर गेहूं किसानों को मिली उपज बेचने की सुविधा
1925 रुपये हुई एमएसपी, रिकार्ड डेढ़ गुना तक हुई बढ़ोत्तरी
200 लाख मीट्रिक टन घोषित किया गेहूं का सरकारी खरीद लक्ष्य
162.71 लाख मीट्रिक टन हुई सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद
29,018 करोड़ रुपये गेहूं किसानों को किया गया भुगतान
33.46 लाख किसान सरकारी गेहूं खरीद योजना से लाभान्वित
42545 मीट्रिक टन मक्का की 106 क्रय केंद्रों पर हुई खरीद
78.7 करोड़ रुपये मक्का किसानों को किया गया भुगतान
37 मंडियों में 1.85 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता में विस्तार
45 कृषि उत्पादों को मंडी शुल्क से किया गया मुक्त
27 मंडियों को आधुनिक किसान मंडी के रूप में विकास
24 मंडियों में कोल्ड स्टोरेज और राइपनिंग चैम्बर्स का निर्माण
वाराणसी और अमरोहा में मैंगो पैक हाउस का निर्माण
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग

गन्ना किसानों को 1.15 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान
गन्ना और चीनी उत्पादन में उत्तरप्रदेश का देश में प्रथम स्थान
देश के कुल चीनी उत्पादन में लगभग 50% हिस्सेदारी
126.42 लाख टन रिकॉर्ड चीनी का उत्पादन
चीनी परता में वृद्धि से 9.14 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन
लॉकडाउन में 119 चीनी मिलों का कराया सफल संचालन
कुल 20 चीनी मीलों का विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण
रमाला, बागपथ चीनी मिल की पेराई क्षमता हुई 5,000 टीसीडी
पिपराइच, गोरखपुर में 5,000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल
मुंडेरवा, बस्ती में 5,000 टीसीडी पेराई क्षमता की नई चीनी मिल
91 चीनी मिलों को लॉकडाउन में सेनेटाइजर बनाने का लाइसेंस
5.90 लाख लीटर प्रतिदिन सेनेटाइजर का उत्पादन कर निर्यात
गन्ना मिलों द्वारा 1,500 करोड़ रुपए की बिजली का उत्पादन
मुंडेरवा, बस्ती में 5,000 टीसीडी का सल्फरलेस चीनी मिल शुरू
पिपराइच में 5,000 टीसीडी का सल्फरलेस चीनी मिल शुरू
सिंचाई योजनाओं से सिंचन क्षमता में विस्तार

46 वर्षों से लंबित बाण सागर परियोजना को पूर्ण किया गया
8 अन्य लघु और मध्यम श्रेणी की बांध परियोजनाएं भी पूर्ण
3.77 लाख हेक्टेयर खेतों की सिंचन क्षमता में हुई वृद्धि
50 लाख किसान ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई योजना से लाभान्वित
2.97 लाख से अधिक किसानों को मुफ्त बोरिंग योजना का लाभ
2,409.64 करोड़ से 247 बाढ़ परियोजनाओं का कार्य प्रारंभ
149 बाढ़ परियोजनाएं पूरी तथा 98 का कार्य प्रगति पर
40 से 70% का अनुदान पाकर 19,483 सोलर पम्प स्थापित
बुंदेलखंड में कराया गया 13,645 खेत तालाबों का निर्माण
बुंदेलखंड में 75 राजकीय नलकूपों का निर्माण कार्य पूरा
बुंदेलखंड में बिजली बिल के फिक्स चार्ज 50-75% तक राहत
गोपालन एवं संरक्षण में अग्रणी

98.34 लाख से अधिक गोवंश की टैगिंग
गो संरक्षण के लिए गोवध निवारण (संशोधन) कानून बनाया
5,150 गो संरक्षण केंद्रों में 5.26 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित
गो पालन पर पशुपालकों को धन देना वाला प्रथम राज्य
66,257 गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत पात्रों को दिए गए
1,178 कुपोषित बच्चों के परिवारों को कुल 1,184 गोवंश दिए गए
1,056 गो आश्रय स्थलों पर जैविक खाद का उत्पादन
3,444 भूसा बैंक स्थापित, 11।56 लाख कुंतल भूसे की व्यवस्था
22.62 करोड़ रुपए मंडी परिषद ने गोशालाओं को किए आवंटित
गोवंश आधारित जीरो बजट खेती को मिला प्रोत्साहन
भदोही और गोरखपुर में बनेगा वैटेनरी विश्वविद्यालय


योगी सरकार का बड़ा एलान, मिलेगी ये राहत

योगी सरकार का बड़ा एलान, मिलेगी ये राहत

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि गन्ना किसानों को बकाया गन्ना मूल्य के एवज में चीनी दी जाएगी। यूपी देश का यह पहला राज्य है जिसने गन्ना किसानों के हित मे इस तरह का फैसला लिया है। इसके पहले यूपी में भी गन्ना किसानों को कभी गन्ना मूल्य के बदले चीनी नहीं दी गयी।

यूपी के गन्ना किसानों को बड़ी राहत
मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ लगातार कोरोना महामारी के दौरान भी गन्ना किसानों के आर्थिक हितों का पूरा ख्याल रख रहे हैं। यह निर्णय उसी श्रंखला की एक कडी है। इन्ही प्रयासों की कड़ी में विस्तृत जानकारी देते हुए प्रदेश के आयुक्त, गन्ना एंव चीनी संजय आर. भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना कृषकों द्वारा चीनी उपलब्ध कराये जाने की मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि पेराई सत्र 2019-20 के तहत गन्ना किसानों को बकाया गन्ना मूल्य के एवज में चीनी की उपलब्धता कराई जाएगी।

बकाए गन्ना मूल्य के बदले मिलेगी चीनी
उन्होंने यह भी बताया की प्रत्येक गन्ना कृषक को 01 कुन्तल चीनी प्रति माह में उस दिन के चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य तथा जी.एस.टी. के आधार पर माह जून, 2020 तक उपलब्ध करायी जायेगी। यदि चीनी मिल द्वारा उस दिन कोई चीनी बिक्री नहीं की गई है तो उसके पूर्व दिवस में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य तथा जी.एस.टी. के आधार पर कृषकों को चीनी उपलब्ध करायी जायेगी।

योगी सरकार ने चीनी मिल मालिकों को दिए ये आदेश
गन्ना आयुक्त द्वारा चीनी मिलों के अध्यासियों को यह भी निर्देशित किया गया कि कृषकों को उपलब्ध करायी जाने वाली चीनी की मात्रा भारत सरकार द्वारा सम्बन्धित चीनी मिल के निर्धारित मासिक कोटे के तहत ही होगी। वहीं जी.एस.टी. को नियमानुसार राजकोष में जमा करने का उत्तरदायित्व सम्बन्धित चीनी मिल का होगा।

अगर जीएसटी जमा करने या न्यूनतम मूल्य से अधिक मूल्य पर कृषकों को चीनी दिए जाने का प्रकरण संज्ञान में आता है तो सम्बन्धित मिल इसके लिए जिम्मेदार होगी। गन्ना आयुक्त द्वारा समस्त जिला गन्ना अधिकारियों एवं उप गन्ना आयुक्तों को इसका नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।