यहां मजबूरी में लड़कियां बन रही हैं लड़का, मामला जानकर हो जाओगे हैरान

यहां मजबूरी में लड़कियां बन रही हैं लड़का, मामला जानकर हो जाओगे हैरान

ये दुनिया बहुत अजीब है। एक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, अल्बेनियन गांव अपनी अलग अलग परम्पराओं की वजह से हमेशा चर्चा में रहा है। इन्ही परम्पराओं में से एक है स्त्रियों को पुरुष बना देना।अल्बेनियन गांव ऐसा है जहां आज भी पुरुषों का महत्व है और स्त्रियों को केवल सेक्स के लिए प्रयोग किया जाता है।


इस गांव में लंबे समय से एक नियम बनाया गया है जिसे वहां के लोग ‘Kanun’ नाम से जानते हैं। इस कानून के तहत महिलाओं को फैमिली प्रॉपर्टी माना जाता है, उन्‍हें बेसिक सुख-सुविधाओं से दूर रखा जाता है। बताया जा रहा है कि अल्बेनियन गांव की महिलाओं को पुरुषों के सामान अधिकार पाने के लिए पुरुष बनना पड़ता है और इसके लिए उन्हें कुछ शर्तों को मानना पड़ता है। इन्‍हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है और जीवन पर्यन्‍त वर्जिन रहना पड़ता है। यह शर्त काफी कठिन होती है लेकिन महिलाओं के सामने कोई दूसरा ऑप्‍शन नहीं है।

यह शपथ अल्बेनियन गांव के 12 बुजुर्गों के सामने दिलवाई जाती है। महिला यह शपथ किसी भी उम्र में ले सकती है। यह शपथ लेने के बाद यहां की महिलाओं की लाइफस्‍टाईल आदमियों जैसी हो जाती है। उनका रहन-सहन और पहनावा और कई आदतें आदमियों वाली हो जाती हैं। इन्‍हें आदमियों वाला नाम रखना पड़ता है, यह खुलेआम सिगरेट व शराब भी पी सकती हैं।


यहां अस्थि कलश के लॉकर भी हुए हाउसफुल, मोक्ष कलश योजना से जाएंगे हरिद्वार

यहां अस्थि कलश के लॉकर भी हुए हाउसफुल, मोक्ष कलश योजना से जाएंगे हरिद्वार

इन दिनों कोरोना महामारी में लोगों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्मशान घाटों में शवों को जलाने के लिए लगी कतारों के बीच सरहदी बाड़मेर के श्मशान घाट में अस्थि कलश के लॉकर अब हाउसफुल हो चुके हैं। लंबे समय से गंगा के पवित्र जल का इंतजार कर रही यह अस्थियां अब मोक्ष कलश योजना से हरिद्वार जाएगी।

अस्थि कलश के लॉकर भी हुए हाउसफुल

कोविड-19 महामारी में श्मशान घाटों में जगह कम पड़ रही है और लोग अपनों के शवों को लेकर घंटों इंतजार कर रहे हैं। सरहदी बाड़मेर जिला मुख्यालय के श्मशान घाट का आलम यह है कि यहां जन अनुशासन पखवाड़े के बाद से 77 शवों को जलाया गया है। जिनमें से 50 फीसदी कोविड संक्रमण की वजह से जान गंवाने वाले लोग थे। श्मशान घाट में बाड़मेर में अस्थि कलश के लॉकर अब हाउसफुल हो चले हैं।


मोक्ष कलश योजना से जाएंगे हरिद्वार

अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अस्थियों को रखने के लिए श्मसान विकास समिति के पास लॉकर नहीं हैं। ऐसे में लकड़ी के संदूक में ही अस्थियों को रखा जा रहा है। लंबे समय से श्मशान के लॉकर में पड़ी अस्थियां हरिद्वार और गंगा के पवित्र पानी का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार की मोक्ष कलश योजना 2020 के तहत राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की नियमित एक्सप्रेस बस में हरिद्वार जाने व आने के लिये मोक्ष कलश के साथ दो यात्रियों को निःशुल्क यात्रा की अनुमति 5 मई से दी गई है।


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