इस लड़के को अजीब बीमारी, 18 महीने से शौच करने नहीं गया लड़का

इस लड़के को अजीब बीमारी, 18 महीने से शौच करने नहीं गया लड़का

एक 16 साल के लड़के को अजीब बीमारी लग गई है। वह पिछले 18 महीने से शौच करने नहीं गया है और रोटी भी वह रोज 18 से 20 खा जाता है। अभी तो उसे कोई परेशानी नहीं आ रही लेकिन उसके परिजन इस बात से चिंतित हैं कि बेटा किसी बड़ी बीमारी का शिकार न हो गया हो, यह हैरतअंगेज मामला मध्‍य प्रदेश के मुरैना जिले का है।

मुरैना में एक गरीब परिवार के बेटे को अनोखी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्‍टर भी जांच की बात कहकर दूर हट रहे हैं। मुरैना के सबजीत का पुरा निवासी मनोज चांदिल का 16 साल का बेटा आशीष चांदिल बीते 18 महीने से शौच करने नहीं गया है।


इस बीमारी की जानकारी मिलते ही परिजनों ने मुरैना-भिण्ड ग्वालियर के कई डॉक्‍टरों को दिखाया। बीमारी पता करने के लिये जांच भी कराईं, लेकिन अभी तक बीमारी का कोई पता नहीं चल सका है।


आशीष रोज 18 से 20 रोटियां भोजन में खा जाता है, इसके बावजूद भी उसके पेट व शरीर में कोई परेशानी नहीं हुई है। सामान्य हालत में यह लड़का अपना जीवन-यापन कर रहा है। परिजनों को इस बात की चिंता सता रही है कि उनका बेटा किसी बड़ी बीमारी से ग्रसित न हो जाये।

इस संबंध में शिशुरोग विशेषज्ञ बीमारी की जानकारी के लिये बड़ी जांच कराने की बात कर रहे हैं। डॉक्‍टर बिना जांच के कोई संभावना भी व्यक्त करना उचित नहीं मान रहे।


एक ऐसी प्रथा जिसमें लड़कियों को इस से बचाने के लिए अपनाई जाती है दर्दनाक प्रथा!

एक ऐसी प्रथा जिसमें लड़कियों को इस से बचाने के लिए अपनाई जाती है दर्दनाक प्रथा!

लड़कियां अक्सर प्रथाओं के नाम पर कुप्रथाओं की भेट चढ़ा दी जाती हैं। ऐसी ही एक अजीबो-गरीब प्रथा सामने आई। ये ख़बर देखने और सुनने में ही दिल दहला देने वाली है। खबर है कि लड़कियों का बलात्कार होने से बचाने के लिए अफ्रीका में एक दर्दनाक प्रथा का चलन है। वहां के लोगों का मानना है कि प्रथा का पालन करने से लड़कियों का रेप नहीं हो सकता और वो शादी से पहले गर्भवती नहीं होंगी। साथ ही कोई भी पुरुष लड़कियों पर बुरी नज़र नहीं डालेगा और वो सुरक्षित रहती हैं। 

अफ्रीका के कई देशों जैसे साउथ अफ्रीका, कैमरून और नाइजीरिया जैसी जगहों पर लड़कियों को रेप से बचने के लिए उन्हें असहनीय पीड़ा और दर्द से गुजरना होता है। इस अनोखी प्रथा का नाम है ‘ब्रेस्ट आयरनिंग’, जिसमें किशोरावस्था के शुरू होते ही लड़कियों के ब्रेस्ट को गर्म लकड़ी के टुकड़ों से दागा जाता है, ताकि वे बढ़ न सकें और सपाट रहें।

ब्रेस्ट आयरनिंग’ प्रथा में किशोरावस्था में ही लड़कियों के स्तन विकसित होने की प्रक्रिया को रोक दिया जाता है। लड़कियों के स्तनों को बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें गर्म लोहे की छड़ों या गर्म पत्थर से दाग दिया जाता है, ताकि वो चपटे हो जाएं और बढ़ें नहीं। 10 साल से कम उम्र की कई लड़कियां भी हर रोज़ इस प्रथा का शिकार होती हैं। आपको जानकर बेहद हैरानी होगी कि लड़कियों की ‘ब्रेस्ट आयरनिंग’ कोई और नहीं बल्कि खुद लड़की की मां ही करती है।

‘ब्रेस्ट आयरनिंग’ के कारण महिलाओं को मानसिक एवं शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। इनके स्तनों में दर्द होता है। चिकित्सकों का कहना है कि शरीर के संवदेनशील अंगों को इस तरह से दबाने से इन महिलाओं को कैंसर का खतरा हो सकता है।


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